गुरुओं ने ना केवल सिखों, बल्कि देश की संस्कृति और जनता को बचाने के लिए भी बलिदान दिए: फडणवीस

गुरुओं ने ना केवल सिखों, बल्कि देश की संस्कृति और जनता को बचाने के लिए भी बलिदान दिए: फडणवीस

गुरुओं ने ना केवल सिखों, बल्कि देश की संस्कृति और जनता को बचाने के लिए भी बलिदान दिए: फडणवीस
Modified Date: January 25, 2026 / 08:50 pm IST
Published Date: January 25, 2026 8:50 pm IST

नांदेड़, 25 जनवरी (भाषा) महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रविवार को कहा कि गुरुओं ने न केवल सिखों के लिए बल्कि देश के लोगों, संस्कृति, विचार और धर्म को बचाने के लिए भी बलिदान दिए।

नांदेड़ में गुरु तेग बहादुर के 350वें शहादत दिवस के अवसर पर आयोजित ‘हिंद दी चादर शहीदी समागम’ के दूसरे दिन एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “हमारे गुरुओं का बलिदान न केवल सिखों के लिए है, बल्कि देश के लोगों, संस्कृति, विचार और धर्म को बचाने के लिए भी था। यदि गुरुओं ने ये बलिदान न दिए होते तो हम आज इस मुकाम पर न होते।’’

मुख्यमंत्री ने कहा कि औरंगजेब जब कश्मीरी पंडितों को धर्म बदलने के लिए मजबूर कर रहा था, तब उन्होंने नौवें सिख गुरु, गुरु तेग बहादुर से संपर्क किया था।

फडणवीस ने कहा, ‘‘वे जानते थे कि यही गुरु उन्हें बचा सकते हैं। औरंगजेब ने गुरु तेग बहादुर को उनकी गिरफ्तारी के बाद या तो धर्म परिवर्तन करने या मरने के लिए कहा, लेकिन गुरु अपने संकल्प पर अडिग रहे। गुरुदेव के साथ आए कुछ लोगों के टुकड़े-टुकड़े कर दिए गए और उनके सिर काट दिए गए। इसके बावजूद औरंगजेब की मंशा पूरी नहीं हुई।’’

मुख्यमंत्री ने नांदेड़ में ‘हिंद दी चादर शहीदी समागम’ के आयोजन के पीछे का उद्देश्य भी बताया।

उन्होंने कहा, ‘‘आज हमने वारकरी समुदाय के साथ नौ समुदायों को इस संगत में एकजुट किया है। हमने महाराष्ट्र के हर घर तक गुरुओं के विचारों को पहुंचाने का संकल्प लिया है। हम गुरुओं के इतिहास को लोगों और बच्चों तक पहुंचाएंगे, क्योंकि यही देश का सच्चा इतिहास है।’’

भाषा संतोष प्रशांत

प्रशांत


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