आईआईटी-मुंबई: छात्र की आत्महत्या के बाद विद्याार्थियों ने छात्र कल्याण सुधारों की मांग की

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आईआईटी-मुंबई: छात्र की आत्महत्या के बाद विद्याार्थियों ने छात्र कल्याण सुधारों की मांग की

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  • Publish Date - September 22, 2026 / 09:58 AM IST,
    Updated On - September 22, 2026 / 09:58 AM IST

मुंबई, 22 सितंबर (भाषा) मुंबई के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के विद्यार्थियों ने छात्र साहिल वाकोडे की आत्महत्या के बाद उत्पन्न चिंताओं का हवाला देते हुए संस्थान की छात्र कल्याण प्रणाली में बदलाव और मानसिक स्वास्थ्य पर अधिक ध्यान दिए जाने की मांग की है।

छात्रों ने यह भी कहा कि इस मामले को लेकर एक प्रोफेसर को निशाना बनाना ‘पूरी तरह गलत’ है।

आईआईटी (मुंबई) में ऊर्जा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के दूसरे साल का बीटेक विद्यार्थी वाकोडे 18 सितंबर की शाम को छात्रावास के अपने कमरे में फंदे पर लटका मृत मिला था। यह घटना ‘मिड-सेमेस्टर’ परीक्षा के दौरान उसे चैटजीपीटी का इस्तेमाल करने के लिए मोबाइल फोन का उपयोग करते हुए पकड़े जाने के कुछ घंटों बाद हुई।

आत्महत्या की घटना के बाद आईआईटी परिसर में विद्यार्थियों ने विरोध-प्रदर्शन किया।

साहिल के परिवार की शिकायत पर मुंबई पुलिस ने प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला के खिलाफ ‘अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम’ और ‘भारतीय न्याय संहिता’ की धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाने) के तहत मामला दर्ज किया है। उन्हें प्रशासनिक मामलों के डीन के पद से हटा दिया गया है।

एक छात्र ने सोमवार को कहा, ‘‘भले ही इस मुद्दे पर विद्यार्थियों की राय अलग-अलग हो, लेकिन हम सब एक बात पर सहमत हैं कि विद्यार्थियों की भलाई के लिए बदलाव की जरूरत है, जिसमें कल्याण प्रकोष्ठ, मनोविज्ञानी की मदद और ऐसी ही दूसरी चीजें शामिल हैं। निर्णय लेते समय विद्यार्थियों की बात सुनी जानी चाहिए।’’

उसने कहा, ‘‘लेकिन, मुझे लगता है कि प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला के साथ किए गए बर्ताव को लेकर विद्यार्थी सहमत नहीं हैं। मीडिया में जो जाति का कोण दिखाया गया है, वह गलत है और ऐसा कुछ भी नहीं है।’’

छात्र ने दावा किया कि प्रोफेसर डूला को डीन (प्रशासनिक मामले) के पद से हटाना पूरी तरह गलत था क्योंकि वह अपना काम कर रहे थे।

एक और छात्र ने भी मीडिया से कहा कि जातिगत भेदभाव की खबरें गलत हैं।

उसने कहा, ‘‘संस्थान में जाति के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होता इसलिए आईआईटी-मुंबई में जातिगत भेदभाव के बारे में मीडिया में प्रसारित खबरें पूरी तरह गलत हैं।’’

एक अन्य छात्र ने कहा कि साहिल वाकोडे ने यह कदम तनाव के कारण उठाया होगा।

हालांकि, कुछ विद्यार्थियों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रोफेसर डूला का विद्यार्थियों को मामूली वजहों से निलंबित करने और उन्हें छात्रावास से निकालने का पुराना रिकॉर्ड रहा है।

उन्होंने दावा किया कि ‘डीन ऑफ स्टूडेंट्स अफेयर्स’ के तौर पर प्रोफेसर डूला के कार्यकाल में उठाए गए कदमों से डर का माहौल बन गया था।

उन्होंने यह भी कहा कि उनके पुराने रिकॉर्ड को देखते हुए उन्हें लगा कि अगर वे इस घटना के बाद इस बारे में बात करते, तो वह उन्हें निलंबित करने का आदेश दे सकते थे।

भाषा राजकुमार सिम्मी

सिम्मी