भारत और अमेरिका को विश्वसनीय कर व्यवस्था पर काम करना चाहिए: राजदूत गोर
भारत और अमेरिका को विश्वसनीय कर व्यवस्था पर काम करना चाहिए: राजदूत गोर
मुंबई, 18 अगस्त (भाषा) अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने मंगलवार को कहा कि भारत और अमेरिका को सच्चे साझेदार के रूप में मतभेदों को दूर करना चाहिए तथा ऐसी विश्वसनीय कर एवं नियामकीय व्यवस्था बनाने के लिए काम करना चाहिए, जिससे कारोबार के विस्तार में मदद मिले।
गोर ने यहां ‘इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स’ में अपने संबोधन में निर्यात नियंत्रण पर स्पष्ट एवं विश्वास पर आधारित बातचीत तथा मजबूत बौद्धिक संपदा संरक्षण की जरूरत पर जोर दिया, ताकि नवोन्मेषकों को बिना किसी डर के निवेश, सृजन और विस्तार का भरोसा मिल सके।
इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) ने ‘भारत-अमेरिका व्यापक रणनीतिक साझेदारी को पुनर्परिभाषित करना’ विषय पर यहां राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया है।
गोर ने कहा कि भारत में अमेरिकी दूतावास ने 20 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक के निवेश आकर्षित करने में दुनियाभर के अमेरिकी दूतावासों में शीर्ष स्थान हासिल किया है।
उन्होंने कहा कि जब भारतीय कंपनियां अमेरिका में निवेश करती हैं, तो यह दोनों पक्षों के लिए फायदे का सौदा होता है। उन्हें दुनिया के सबसे गतिशील बाजारों में से एक तक पहुंच मिलती है।
गोर ने कहा, ‘‘इस रिश्ते में अविश्वसनीय एवं असाधारण संभावनाएं हैं। आर्थिक इंजन की पूरी क्षमता को सामने लाने के लिए हमें सच्चे साझेदार के रूप में मिलकर मतभेद के मुद्दों का समाधान करना होगा। हमें ऐसी विश्वसनीय कर एवं नियामकीय व्यवस्था की जरूरत है, जिससे कारोबार बढ़ सके।’’
अमेरिकी राजदूत ने कहा कि जब दुनियाभर की कंपनियां उनसे कहती हैं कि उनके बौद्धिक संपदा अधिकारों की चोरी हुई है और वे अपनी कंपनियां भारत ले जाना चाहती हैं, तो वे पूछती हैं कि क्या यहां उनका कारोबार सुरक्षित है और मेरा जवाब हमेशा ‘हां’ होता है।
उन्होंने कहा, ‘‘हम भारत पर भरोसा करते हैं।’’
गोर ने कहा कि (अमेरिका के) राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले दिन से ही भारत पर भरोसा किया है और इस रिश्ते में भारी निवेश किया है।
उन्होंने कहा कि केवल दो दशक से कुछ अधिक समय में भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार ने नए रिकॉर्ड बनाए हैं और वस्तुओं तथा सेवाओं का व्यापार 20 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 240 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया है।
राजदूत ने कहा कि 12 गुना वृद्धि अपने आप नहीं होती और दोनों देश 2030 तक इस आंकड़े को 500 अरब अमेरिकी डॉलर तक ले जाने की महत्वाकांक्षा साझा करते हैं। यह इस साझेदारी की अपार संभावनाओं को दर्शाता है।
गोर ने कहा, ‘‘जब भारत और अमेरिका मिलकर काम करते हैं, तो वे मूल्य श्रृंखलाओं को एकीकृत करते हैं, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में प्रगति को तेज करते हैं और आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती बढ़ाते हैं।’’
भाषा निहारिका मनीषा
मनीषा

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