मुंबई का माहौल बिगाड़ना चाहते हैं उप्र-बिहार चुनाव पर आंख गड़ाए नेता, परिवहन मंत्री का दावा
मुंबई का माहौल बिगाड़ना चाहते हैं उप्र-बिहार चुनाव पर आंख गड़ाए नेता, परिवहन मंत्री का दावा
मुंबई, 25 अगस्त (भाषा) महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने मंगलवार को आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश और बिहार में होने वाले ‘चुनावों’ पर नजर गड़ाए बैठे कुछ नेता, ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा की अनिवार्यता को लेकर मुंबई और ठाणे में जानबूझकर ‘मराठी-हिंदी’ विवाद खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं।
चालकों के बीच फैले डर और घबराहट को दूर करने के प्रयास में, मंत्री ने कहा कि मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) में मराठी भाषा के जो प्रशिक्षण केंद्र 15 अगस्त के बाद बंद कर दिए गए थे, उन्हें फिर से शुरू किया जाएगा।
इसके अतिरिक्त, चालकों के लिए एक समर्पित मोबाइल नंबर भी जारी किया जाएगा, जिस पर संपर्क करके वे एमएमआर में मौजूद मराठी भाषा केंद्रों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।
सरनाईक ने स्पष्ट किया कि अब तक किसी भी टैक्सी या ऑटो-रिक्शा चालक पर 500 रुपये का भी जुर्माना नहीं लगाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग चालकों पर 20,000 रुपये से 25,000 रुपये तक का भारी जुर्माना लगाए जाने का भ्रामक दावा कर रहे हैं।
राज्य सचिवालय में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए सरनाईक ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की और कहा, ‘समाज में हिंदी और मराठी भाषा के नाम पर जानबूझकर विवाद खड़ा करने और शांतिपूर्ण माहौल को बिगाड़ने का प्रयास किया जा रहा है।’
सरनाईक ने यह भी आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश और बिहार के कुछ नेता जानबूझकर ऐसे वीडियो बना रहे हैं, जिनमें ऑटो-रिक्शा को ट्रेनों से उत्तर भारत ले जाते दिखाया जा रहा है और ‘हम तो चले परदेस’ जैसे गाने बैकग्राउंड में लगाकर प्रसारित किए जा रहे हैं, जबकि असल में ये वाहन महाराष्ट्र में ही चल रहे हैं।
मुंबई और ठाणे क्षेत्रों में मूल रूप से उत्तर प्रदेश और बिहार से आए प्रवासियों की एक बड़ी आबादी रहती है, जो राजनीतिक दलों के लिए एक बड़ा वोट बैंक मानी जाती है।
शिवसेना (शिंदे गुट) के वरिष्ठ नेता का यह बयान उन खबरों के बाद आया है, जिनमें इस मराठी भाषा प्रवीणता अभियान के तहत भारी-भरकम जुर्माने की अफवाहों के चलते मुंबई के कई हिस्सों में चालकों द्वारा विरोध प्रदर्शन किया गया था। इस भ्रम की स्थिति को दूर करने के लिए खुद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सामने आना पड़ा था।
सरनाईक ने बताया कि उनके साथी और पार्टी में उत्तर भारतीय समाज का प्रतिनिधित्व करने वाले संजय निरूपम, समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी और ऑटो-टैक्सी यूनियन नेता शशांक राव सहित कई लोगों ने इस संबंध में उनसे संपर्क किया था।
परिवहन मंत्री ने कहा कि अब तक किसी भी राजनीतिक दल या चालक संगठन ने गैर-मराठी चालकों के लिए मराठी का ‘कार्यसाधक ज्ञान’ अनिवार्य करने के सरकार के फैसले का विरोध नहीं किया है। फिर भी इस मुद्दे पर जानबूझकर क्षेत्रीय तनाव पैदा करने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने दावा किया, ‘चूंकि उत्तर प्रदेश और बिहार में चुनाव होने वाले हैं, इसलिए वहां के कुछ नेता मुंबई और ठाणे में स्थिति तनावपूर्ण बनाना चाहते हैं।’
सरनाईक ने यह भी आरोप लगाया कि उत्तर भारत के कुछ नेता जानबूझकर ऐसे वीडियो बना रहे हैं, जिनमें ऑटो-रिक्शा को ट्रेनों से उत्तर भारत ले जाते दिखाया जा रहा है और ‘हम तो चले परदेस’ जैसे गाने बैकग्राउंड में लगाकर प्रसारित किए जा रहे हैं, जबकि असल में ये वाहन महाराष्ट्र में ही चल रहे हैं।
बिहार में जहां नवंबर 2025 में चुनाव हुए थे, वहीं उत्तर प्रदेश में अगले साल चुनाव होने हैं।
परिवहन मंत्री ने आरोप लगाया कि कुछ ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों ने एक दिन पहले भ्रम पैदा करने की कोशिश की थी, हालांकि किसी भी यूनियन ने उनका समर्थन नहीं किया था।
एक दिन पहले कई ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों ने मुंबई के पश्चिमी उपनगरों सहित विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शन किया था, जिससे यात्रियों को काफी असुविधा हुई थी।
सरनाईक ने बताया कि ‘कोकण मराठी साहित्य परिषद’, जिसने 15 अगस्त को समाप्त हुए 105 दिनों के दौरान 1.65 लाख चालकों को कामचलाऊ मराठी का प्रशिक्षण दिया था, अब और अधिक चालकों को प्रशिक्षण प्रदान करेगी।
मंत्री ने आरटीओ अधिकारियों के साथ एक वीडियो कॉल पर बैठक की और उन्हें एक मोबाइल नंबर जारी करने का निर्देश दिया, जिससे चालक मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) में मराठी भाषा प्रशिक्षण केंद्रों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकें।
कोकण मराठी साहित्य परिषद के प्रदीप ढवल ने संवाददाताओं को बताया कि संस्था एमएमआर में 16 केंद्र संचालित करती रहेगी, जहां गैर-मराठी भाषी चालक भाषा का कामचलाऊ ज्ञान हासिल कर सकते हैं।
टैक्सी और ऑटो-रिक्शा यूनियन नेता शशांक राव ने कहा कि उन्होंने चालकों को मराठी सीखने के लिए सरकार से तीन महीने का समय मांगा था और सरकार इस पर सहमत हो गई है।
उन्होंने कहा, ’15 अगस्त के बाद मराठी भाषा सीखने के केंद्र चालू न होने से चालकों में भय का माहौल था, लेकिन अब इस मुद्दे को सुलझा लिया गया है।’
सरनाईक ने कहा कि यद्यपि राव ने चालकों के लिए तीन महीने का समय मांगा था, लेकिन तकनीकी रूप से उन्हें चार महीने का समय दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी चालक को मराठी का कामकाजी ज्ञान नहीं है, तो उसका बैज (बिल्ला) एक महीने के लिए निलंबित कर दिया जाएगा।
उन्होंने कहा, ‘इस महीने की शुरुआत में संशोधित किए गए नियमों के अनुसार, यदि कोई चालक इस अवधि के दौरान भाषा सीखने में विफल रहता है, तो उसका बैच रद्द करने से पहले उसे तीन महीने का और समय दिया जाएगा। यह बैच ही उसे वाहन संचालित करने के अधिकार पत्र के रूप में कार्य करता है।’
सरनाईक ने कहा कि अगर कोई चालक चार महीने बाद भी मराठी सीखने में असमर्थ रहता है, तो इसका सीधा मतलब है कि उसे इस भाषा से लगाव नहीं है और उसे ‘मराठी पहचान’ की जरूरत नहीं है।
शिवसेना विधायक ने स्पष्ट किया कि महायुति सरकार रोजगार पैदा करती है और वह किसी की आजीविका नहीं छीनेगी।
सोमवार को हुए विरोध प्रदर्शनों पर पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए सरनाईक ने कानून अपने हाथ में लेने की कोशिश करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी।
भाषा सुमित माधव
माधव

Facebook


