महाराष्ट्र बोर्ड की 12वीं कक्षा के परीक्षा परिणाम में 93.37 प्रतिशत छात्र उत्तीर्ण, तनीषा रहीं अव्वल |

महाराष्ट्र बोर्ड की 12वीं कक्षा के परीक्षा परिणाम में 93.37 प्रतिशत छात्र उत्तीर्ण, तनीषा रहीं अव्वल

महाराष्ट्र बोर्ड की 12वीं कक्षा के परीक्षा परिणाम में 93.37 प्रतिशत छात्र उत्तीर्ण, तनीषा रहीं अव्वल

:   Modified Date:  May 21, 2024 / 09:04 PM IST, Published Date : May 21, 2024/9:04 pm IST

पुणे/छत्रपति संभाजीनगर, 21 मई (भाषा) महाराष्ट्र राज्य माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने मंगलवार को 12वीं कक्षा के परीक्षा परिणाम घोषित किए, जिसमें 93.37 प्रतिशत छात्र उत्तीर्ण हुए।

छत्रपति संभाजीनगर की तनीषा बोरमणिकर परीक्षा में पूरे 600 अंक हासिल कर अव्वल रहीं।

बोर्ड के अध्यक्ष शरद गोसावी द्वारा घोषित परिणामों के अनुसार, 91.60 प्रतिशत छात्रों जबकि 95.44 प्रतिशत छात्राओं ने परीक्षा उत्तीर्ण की।

गोसावी ने कहा कि मार्च में आयोजित परीक्षाओं के लिए कुल 14,33,371 छात्रों ने पंजीकरण कराया था, उनमें से 14,23,970 छात्रों ने परीक्षा दी और 13,29,684 उत्तीर्ण हुए।

कोंकण संभाग 97.51 प्रतिशत छात्रों के उत्तीर्ण होने के साथ शीर्ष पर रहा, नासिक संभाग में 94.71 प्रतिशत, पुणे में 94.44 प्रतिशत, कोल्हापुर संभाग में 94.24 प्रतिशत, छत्रपति संभाजीनगर में 94.08 प्रतिशत, अमरावती में 93 प्रतिशत, लातूर में 92.36 प्रतिशत, नागपुर में 92.12 प्रतिशत, और सबसे कम मुंबई में 91.95 प्रतिशत छात्र उत्तीर्ण हुए।

गोसावी ने कहा कि विज्ञान वर्ग में 97.82 फीसदी, कला वर्ग में 85.88 फीसदी, वाणिज्य वर्ग में 92.18 फीसदी और व्यवसायिक वर्ग में 87.75 फीसदी छात्र उत्तीर्ण हुए।

छत्रपति संभाजीनगर बोर्ड के एक अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को फोन पर बताया कि वाणिज्य वर्ग की छात्रा तनीषा ने कला, विज्ञान और वाणिज्य तीनों वर्ग के छात्रों में सबसे अधिक अंक हासिल किए हैं।

शतरंज खिलाड़ी और देवगिरी कॉलेज की छात्रा तनीषा ने परीक्षा में 582 अंक हासिल किए और उन्हें खेल कोटे से 18 अंक मिले। इससे उन्हें 600 में से 600 अंक मिले।

तनीषा ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बात करते हुए कहा, “मेरे कुछ लक्ष्य हैं और मैंने सही लक्ष्यों को प्राथमिकता दी, यही वजह है कि मैं सफल हुई। मैंने परीक्षा से पहले 45 दिन तक कड़ी मेहनत की।”

तनीषा की मां एक ‘चार्टर्ड अकाउंटेंट’ हैं।

तनीषा ने कहा, “मैंने शतरंज प्रतियोगिताओं में भाग लेना जारी रखा। जब भी मेरा कोई टूर्नामेंट होता था, तो मैं उसके लिए 30 दिन तक तैयारी करती थी, दिन में लगभग दो घंटे अभ्यास करती थी। लेकिन मैंने यह सुनिश्चित किया कि एचएससी परीक्षा से 45 दिन पहले शतरंज मेरी दिनचर्या का हिस्सा न हो।”

भाषा

जोहेब पवनेश

पवनेश

 

(इस खबर को IBC24 टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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