महाराष्ट्र कैबिनेट ने आईटी-एआई विभाग को मंजूरी दी

महाराष्ट्र कैबिनेट ने आईटी-एआई विभाग को मंजूरी दी

महाराष्ट्र कैबिनेट ने आईटी-एआई विभाग को मंजूरी दी
Modified Date: April 7, 2026 / 03:59 pm IST
Published Date: April 7, 2026 3:59 pm IST

मुंबई, सात अप्रैल (भाषा) महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने मंगलवार को ‘विकसित भारत 2047’ दृष्टि के तहत राज्य के विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता विभाग के गठन को मंजूरी दी।

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, वर्तमान सूचना प्रौद्योगिकी निदेशालय को इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आयुक्तालय में अद्यतन किया जाएगा।

राज्य में सूचना प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल शासन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य सचिवालय, मंत्रालय, कमश्नरेट और जिला स्तर पर स्थायी पदों के साथ एक समर्पित सूचना प्रौद्योगिकी कैडर का गठन भी किया जाएगा।

कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने की। कैबिनेट ने महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (महावितरण) के वित्तीय पुनर्गठन को भी मंजूरी दी।

बयान में कहा गया है कि इस योजना के तहत, सरकार पूंजी बाजार में बांड के माध्यम से 32,679 करोड़ रुपये का सरकारी ऋण जुटाएगी। बयान में कहा गया है कि कृषि वितरण व्यवसाय को अलग किया जाएगा और कंपनी को शेयर बाजार में सूचीबद्ध किया जाएगा।

एक अन्य निर्णय में, मंत्रिमंडल ने महाराष्ट्र सुदूर संवेदन अनुप्रयोग केंद्र (एमआरएसएसी) को कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 8 के तहत एक कंपनी में परिवर्तित करने को मंजूरी दी।

इस कदम से सड़क सूचना प्रणाली, शहरी नियोजन, जलग्रहण क्षेत्र विकास, पहाड़ी क्षेत्र विकास, ई-पंचनामा, कृषि प्रौद्योगिकी, मैंग्रोव अध्ययन, भूजल प्रबंधन और खनन से संबंधित परियोजनाओं में तेजी आने की उम्मीद है।

कैबिनेट ने शासन में भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए महाराष्ट्र भू-प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग केंद्र (महाजियोटेक) की स्थापना को भी मंजूरी दी।

इस पहल से प्रशासनिक दक्षता में वृद्धि होने और अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, साथ ही छात्रों और पेशेवरों के लिए शैक्षिक कार्यक्रमों को भी सक्षम बनाया जा सकेगा।

इसके अतिरिक्त, कैबिनेट ने महाराष्ट्र उत्तरदायी विकास कार्यक्रम (एमआरडीपी) को भी मंजूरी दी, जिसका उद्देश्य निजी क्षेत्र की भागीदारी के साथ आपदा प्रबंधन के लिए धन जुटाना है। इस कार्यक्रम को विश्व बैंक से 165 करोड़ रुपये की सहायता प्राप्त होगी।

बयान में कहा गया है कि कृष्णा बेसिन में बाढ़ के खतरे को कम करने के उपायों के साथ-साथ कोल्हापुर, सांगली और इचलकरंजी के लिए भी बाढ़ से बचाव की योजनाएं तैयार की जाएंगी।

भाषा अमित अविनाश

अविनाश


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