ठाणे, 31 मार्च (भाषा) ठाणे की एक विशेष सीबीआई अदालत ने 19 वर्ष पुराने रिश्वत मामले में एक पूर्व आयकर अधिकारी को छह महीने के कठोर कारावास (आरआई) की सजा सुनाई तथा उस पर 4,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
विशेष न्यायाधीश डी एस देशमुख ने 27 मार्च को यह फैसला सुनाया। दोषी ठहराए गए अधिकारी की पहचान 77 वर्षीय दीनानाथ कृष्णा पुथरन के रूप में हुई है। यह मामला 2007 का है और इसकी सुनवाई 18 वर्षों से अधिक समय तक चली।
अदालत ने इस मामले में आरोपी के साथ सह-अभियुक्त बनाए गए एक चार्टर्ड अकाउंटेंट और एक कर सहायक को प्रत्यक्ष साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।
मामले के अनुसार, पुथरन वर्ष 2007 में नवी मुंबई के वाशी में आयकर अधिकारी के पद पर तैनात थे। उस समय मेसर्स श्री लक्ष्मी इलेक्ट्रिकल्स एंड कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक समराज नाइकर ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि पुथरन कंपनी और उनकी पत्नी के कर मामलों के आकलन को अंतिम रूप देने के लिए 40,000 रुपये की रिश्वत मांग रहे थे और उन्हें परेशान कर रहे थे। अदालत के अनुसार, आरोपी ने प्रारंभ में 50,000 रुपये की मांग की थी, जिसे बाद में घटाकर 40,000 रुपये कर दिया गया।
सीबीआई ने तीन जनवरी 2007 को जाल बिछाकर पुथरन को 20,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी ने चार्टर्ड अकाउंटेंट जयंत दत्तात्रेय अध्यापक पर कथित रूप से सहयोग करने और कर सहायक प्रकाश गुनाजी नेवरेकर पर अतिरिक्त 1,000 रुपये लेने का आरोप लगाया था।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में सफल रहा कि आरोपी ने लोक सेवक के रूप में अपने पद का दुरुपयोग करते हुए 20,000 रुपये मांगे और लिया।
हालांकि, जिरह के दौरान शिकायतकर्ता ने स्वीकार किया कि उन्होंने सीबीआई को दी गई लिखित शिकायत में अन्य आरोपियों की भूमिका के बारे में कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं किया था। इसी आधार पर अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में सह-अभियुक्तों को बरी कर दिया।
भाषा
मनीषा संतोष
संतोष