मुंबई, 19 अगस्त (भाषा) महाराष्ट्र सरकार ने 2010 से सहकारी आवासीय सोसाइटी को सरकारी जमीन आवंटित करने पर लगी रोक हटा दी है लेकिन नीति में संशोधन करते हुए ऐसी सोसाइटी के लिए पिछड़े वर्गों और दिव्यांगों के लिए फ्लैट का आवंटन अनिवार्य कर दिया है।
राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने बुधवार को कहा कि नयी नीति के तहत, सरकारी जमीन प्राप्त करने वाली प्रत्येक आवासीय सोसाइटी के कम से कम 20 प्रतिशत फ्लैट या भूखंड पिछड़े वर्गों को और पांच प्रतिशत फ्लैट या भूखंड दिव्यांगों को आवंटित किये जाने चाहिए।
उन्होंने बताया कि यह नीति सरकारी भूखंड के आवंटन के लिए पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया का भी प्रावधान करती है।
सरकार ने इससे पहले नौ जुलाई, 1999 और 25 मई, 2007 के प्रस्तावों के तहत सहकारी आवास सोसाइटी को भूमि आवंटित की थी। लेकिन 2010 में हुए विवाद के बाद नयी सोसाइटी को भूखंड आवंटित करने की प्रक्रिया रोक दी गई थी।
बावनकुले ने बताया कि संशोधित नीति को कोल्हापुर की संजय गांधी सहकारी आवासीय सोसाइटी द्वारा उच्च न्यायालय में दायर याचिका और 25 नवंबर, 2024 को उच्चतम न्यायालय की टिप्पणियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
नयी व्यवस्था के तहत, सरकारी जमीन अब पहले वाले लॉटरी तरीके से आवंटित नहीं की जाएगी। अब जिलाधिकारी उपलब्ध भूखंड की सूची तैयार करेंगे और सार्वजनिक विज्ञापनों तथा तकनीकी और वित्तीय बोली प्रक्रिया के जरिए नीलामी करवाएंगे।
बावनकुले ने बताया कि मुंबई शहर और उपनगरों में जमीन की बाजार कीमत का 2.5 प्रतिशत और महाराष्ट्र के बाकी हिस्सों में पांच प्रतिशत आधार मूल्य होगा। सबसे अधिक बोली लगाने वाली सोसाइटी को चुना जाएगा। जमीन केवल 30 साल के लिए पट्टे पर दी जाएगी और यह अवधि पूरी होने के बाद ही इसे ‘क्लास-1 ऑक्यूपेंसी’ में बदलने के लिए योग्य माना जाएगा।
इस नीति के तहत उपलब्ध भूखंड का 40 प्रतिशत हिस्सा सामान्य श्रेणी के लिए, 15 प्रतिशत राज्य सरकार, स्थानीय निकाय और निगम के कर्मियों के लिए, 10 प्रतिशत अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और खानाबदोश जनजातियों के लिए, और 10 प्रतिशत लेखकों, कलाकारों, खिलाड़ियों और पत्रकारों के लिए आरक्षित किया गया है।
केंद्र सरकार के कर्मचारियों, सशस्त्र बलों के सेवारत या पूर्व कर्मियों, चुने गए और पूर्व सांसदों एवं विधायकों, स्वतंत्रता सेनानियों और उनके उत्तराधिकारियों, दिव्यांगों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए पांच-पांच प्रतिशत आरक्षण रखा गया है।
भाषा धीरज देवेंद्र
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