मुंबई, 21 मई (भाषा) शरद पवार के नेतृत्व वाली राकांपा (शप) ने बृहस्पतिवार को महाराष्ट्र सरकार पर एक ‘‘असंवैधानिक’’ नियम लाने का आरोप लगाया, जो पिछड़े वर्गों, आदिवासी समुदायों, ओबीसी और अल्पसंख्यक समुदाय के उम्मीदवारों को शिक्षा और सरकारी नौकरियों में उनके उचित अवसरों से वंचित कर देगा।
राकांपा (शप) के प्रवक्ता महेश तापसे ने यहां एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि संविधान में पिछड़े वर्गों एवं आदिवासियों के लिए शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण का प्रावधान होने के बावजूद, राज्य सरकार ने एक ‘‘अजीब नियम’’ बनाया है जिसके तहत आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों को आरक्षण से संबंधित किसी भी छूट का लाभ उठाने पर ‘ओपन मेरिट’ श्रेणी में नहीं माना जाएगा, भले ही उन्होंने सामान्य श्रेणी के कट-ऑफ से अधिक अंक प्राप्त किए हों।
उन्होंने कहा, ‘‘भले ही ऐसे छात्र या उम्मीदवार योग्यता के आधार पर अंक प्राप्त कर ‘ओपन मेरिट’ में अर्हता प्राप्त कर लें, फिर भी उन्हें आरक्षित वर्ग के कोटे के तहत ही प्रवेश या नौकरी लेने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। उन्हें ‘ओपन मेरिट’ की योग्यता का लाभ नहीं मिलेगा। यह पूरी तरह से असंवैधानिक निर्णय है।’’
तापसे ने न्यायमूर्ति नरसिम्हा और न्यायमूर्ति पारदीवाला द्वारा दिए गए उच्चतम न्यायालय के एक फैसले का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि आरक्षित श्रेणियों के मेधावी छात्र जिनके अंक ‘ओपन मेरिट’ के कट-ऑफ से ऊपर हैं, उन्हें सामान्य मेधावी उम्मीदवारों के रूप में माना जाना चाहिए, भले ही उन्होंने आरक्षण का लाभ उठाया हो।
पिछड़े वर्गों, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों और अन्य वंचित वर्गों को शिक्षा और रोजगार के अवसरों से वंचित करने की साजिश का आरोप लगाते हुए, तापसे ने भारतीय जनता पार्टी पर आरक्षण विरोधी एजेंडा चलाने का आरोप लगाया।
महाराष्ट्र सरकार ने 14 मई को अपनी मंत्रिमंडल बैठक में एक प्रस्ताव को मंजूरी दी, जिसके अनुसार आयु, शैक्षणिक योग्यता, अनुभव और प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रयासों की संख्या में छूट का लाभ उठाने वाले आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवार केवल आरक्षित श्रेणी के पदों के लिए ही पात्र होंगे, न कि ‘ओपन मेरिट’ की सीटों के लिये।
भाषा शफीक नरेश
नरेश