महाराष्ट्र: हत्या मामले में पकड़े गये नाबालिगों को यातना देने पर प्राथमिकी दर्ज करने की सिफारिश
महाराष्ट्र: हत्या मामले में पकड़े गये नाबालिगों को यातना देने पर प्राथमिकी दर्ज करने की सिफारिश
पुणे, 10 सितंबर (भाषा) महाराष्ट्र मानवाधिकार आयोग (एमएसएचआरसी) ने कथित रूप से बच्चों को वाहन के बोनट से बांधकर उन्हें घुमाने, अवैध रूप से हिरासत में लेने, उन्हें यातना देने के मामले में पुणे पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की सिफारिश की है।
आयोग ने मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का हवाला देते हुए महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को उसकी तथ्यान्वेषण रिपोर्ट को प्राथमिकी के रूप में दर्ज करने का निर्देश दिया है।
आयोग की पूर्ण पीठ में अध्यक्ष न्यायमूर्ति ए. एम. बादर और सदस्य संजय कुमार तथा स्वप्ना जोशी शामिल थे।
आदेश में कहा गया, ‘‘हम सिफारिश करते हैं कि चूंकि आरोप वर्तमान पुलिस आयुक्त अमितेश कुमार के खिलाफ भी हैं, जो अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) स्तर के अधिकारी हैं, इसलिए पुलिस महानिदेशक को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जांच का जिम्मा अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक या उससे ऊपर के स्तर के अधिकारी को सौंपा जाए।’’
यह आदेश विशेष पुलिस महानिरीक्षक दत्तात्रय कराले, पुलिस अधीक्षक विश्वास पांधरे और एमएसएचआरसी के रजिस्ट्रार विजय केदार की तीन सदस्यीय समिति द्वारा की गई प्रारंभिक तथ्यान्वेषण के बाद आया है।
समिति की दो हिस्सों वाली रिपोर्ट में पुलिस की कथित बर्बरता और व्यवस्थित मानसिक उत्पीड़न के गंभीर विवरण सामने आए।
रिपोर्ट के अनुसार, इस साल 21 जुलाई को भारती विद्यापीठ थाने के कर्मियों ने हत्या के एक मामले में हिरासत में लिए गए तीन नाबालिगों को रस्सियों से पुलिस वाहन के बोनट पर बांध दिया था।
जांच में यह भी सामने आया कि नाबालिगों को कथित तौर पर हिरासत में हिंसा का सामना करना पड़ा।
रिपोर्ट में कहा गया कि उन्हें 20 जुलाई एवं 24 जुलाई के बीच निर्धारित कानूनी सीमा से अधिक समय तक अवैध रूप से पुलिस लॉकअप में रखा गया, जिसके बाद उन्हें किशोर न्याय बोर्ड के सामने पेश किया गया।
भाषा
देवेंद्र राजकुमार
राजकुमार

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