मुंबई, 30 अप्रैल (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय ने कहा कि पुलिस ने 26/11 के मुंबई आतंकवादी हमले से जुड़े मामले में बरी किए गए फहीम अंसारी को जन सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट (पीसीसी) जारी करने से इनकार किया और उसका यह फैसला उचित है।
न्यायमूर्ति एएस गडकरी और न्यायमूर्ति आरआर भोंसले की पीठ ने यह टिप्पणी बुधवार को अंसारी की उस याचिका को खारिज करते समय की, जिसमें उसने आजीविका के लिए ऑटो-रिक्शा चलाने के वास्ते पीसीसी जारी किए जाने का अनुरोध किया था।
पीसीसी एक सरकारी दस्तावेज है, जो प्रमाणित करता है कि संबंधित व्यक्ति का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।
विस्तृत फैसले की प्रति बृहस्पतिवार को उपलब्ध कराई गई।
पीठ ने अपने फैसले में कहा कि अदालत ने पुलिस की ओर से पेश खुफिया रिपोर्ट पर विचार किया, जो ‘प्रथम दृष्टया’ यह संकेत देती है कि अंसारी के इसी तरह की गतिविधियों में शामिल होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है।
पीठ ने कहा, “हमें सरकार के रुख से असहमत होने का कोई कारण नजर नहीं आता और न ही उसमें कोई खामी दिखाई देती है।”
उच्च न्यायालय ने कहा कि अंसारी के आपराधिक इतिहास के मद्देनजर उसे “जन सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए उचित तरीके से” पीसीसी जारी करने से इनकार किया गया है।
अंसारी ने पिछले साल जनवरी में आरटीओ बैज और परमिट के लिए अनिवार्य पीसीसी को जारी किए जाने का उसका आवेदन खारिज होने के बाद उच्च न्यायालय का रुख किया था।
प्राधिकारियों ने अंसारी को एक आरटीआई आवेदन के जवाब में सूचित किया था कि आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से संबंधों के आरोपों के चलते उसे पीसीसी जारी नहीं किया जा सकता है।
अंसारी ने उच्च न्यायालय में दाखिल याचिका में दलील दी थी कि 26/11 मामले में उसकी गिरफ्तारी और अभियोजन के आधार पर उसे सार्वजनिक सुविधाओं एवं अवसरों के लाभ से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
उसने प्राधिकारियों के फैसले को “मनमाना, गैरकानूनी और भेदभावपूर्ण” बताते हुए कहा था कि इससे आजीविका के उसके मौलिक अधिकार का उल्लंघन होता है।
पिछले साल सितंबर में सरकार ने अंसारी की याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि वह अभी भी निगरानी के दायरे में है और उसे पीसीसी जारी न करने का प्राधिकारियों का फैसला उचित है।
सरकार ने अंसारी के खिलाफ कुछ संवेदनशील जानकारी/आधिकारिक खुफिया संवाद वाला एक गोपनीय दस्तावेज भी पेश किया था और कहा था कि इसी के आधार पर उसे पीसीसी देने से इनकार कर दिया गया।
अदालत ने कहा कि अंसारी के लिए आजीविका के अवसर केवल कुछ ही पेशों के मामले में सीमित किए गए हैं और उसके लिए रोजगार के कई अन्य रास्ते अब भी खुले हुए हैं।
पीठ ने कहा कि प्रशासन ने पीसीसी देने से इनकार करके सही किया है और यह फैसला आम जनता और राष्ट्र की सुरक्षा के व्यापक हित को ध्याम में रखते हुए लिया गया है।
मुंबई में 26 नवंबर 2008 को 10 पाकिस्तानी आतंकवादियों ने छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, ताज होटल, ओबेरॉय होटल और कई अन्य प्रमुख प्रतिष्ठानों पर सिलसिलेवार हमला किया था, जिसमें कम से कम 166 लोगों की मौत हो गई थी और सैकड़ों अन्य घायल हुए थे। इस दौरान, जवाबी कार्रवाई में नौ आंतकवादी भी मारे गए थे।
मई 2010 में विशेष अदालत ने हमलों के दौरान जिंदा पकड़े गए एकमात्र पाकिस्तानी आतंकवादी अजमल कसाब को दोषी करार दिया था, लेकिन दो भारतीय आरोपियों-फहीम अंसारी और सबाउद्दीन अहमद को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था।
हालांकि, अंसारी को उत्तर प्रदेश में एक अन्य मामले में दोषी ठहराया गया और 10 साल की जेल की सजा सुनाई गई। सजा पूरी होने के बाद 2019 में उसे जेल से रिहा कर दिया गया।
भाषा
राजकुमार पारुल
पारुल