मुंबई मॉल मामले में आरोपी ने चैटजीपीटी से बनाया था पीएमओ का फर्जी पहचान पत्र: पुलिस

मुंबई मॉल मामले में आरोपी ने चैटजीपीटी से बनाया था पीएमओ का फर्जी पहचान पत्र: पुलिस

मुंबई मॉल मामले में आरोपी ने चैटजीपीटी से बनाया था पीएमओ का फर्जी पहचान पत्र: पुलिस
Modified Date: September 11, 2026 / 05:22 pm IST
Published Date: September 11, 2026 5:22 pm IST

मुंबई, 11 सितंबर (भाषा) मुंबई के एक शॉपिंग मॉल में जबरन घुसने की कोशिश करने के आरोपी दो लोगों में से एक ने स्वीकार किया है कि उसने समाज में अपना दबदबा बढ़ाने के लिए चैटजीपी की मदद से प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) का फर्जी पहचान पत्र बनाया था। पुलिस ने शुक्रवार को यहां एक अदालत को यह जानकारी दी।

आरोपियों की पहचान रोहन पारिख (24) और दिलीप कुंडे (49) के रूप में हुई है। पुलिस हिरासत खत्म होने पर दोनों को यहां अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एस्प्लेनेड अदालत) डी.एस. खेडेकर के सामने पेश किया गया।

अदालत ने दोनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

पुलिस ने जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की तकनीकी जांच पूरी करने और वांछित आरोपी को पकड़ने के लिए दोनों की हिरासत बढ़ाने का अनुरोध किया था।

पुलिस ने अदालत को बताया कि पारिख के घर की तलाशी के दौरान प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से जुड़े अंग्रेजी भाषा के दस्तावेज जब्त किए गए।

जांचकर्ताओं ने कहा, “पारिख ने स्वीकार किया है कि उसने 2025 से अपने परिवार और समाज में अपनी सामाजिक स्थिति और दबदबा बढ़ाने के लिए चैटजीपीटी की मदद से पीएमओ का फर्जी पहचान पत्र और उससे जुड़े दस्तावेज बनाए थे।”

पुलिस ने बताया कि उसके फोन का डेटा निकाला गया, जिससे यह पता चला कि उसने पीएमओ से जुड़े पत्र तैयार करने की जानकारी खोजी थी।

पुलिस ने कहा कि यह पता लगाने के लिए पारिख की हिरासत जरूरी है कि उसने किसी अन्य स्थान पर भी इन फर्जी पीएमओ दस्तावेजों या पहचान पत्र का इस्तेमाल किया था या नहीं।

पुलिस ने यह भी कहा कि पूर्व सैन्य कर्मी कुंडे के पास से रिवॉल्वर बरामद हुई थी और उसने माना है कि उसके निजी इस्तेमाल के लिए रखे हथियार का इस्तेमाल पारिख के पेशेवर बॉडीगार्ड के रूप में व्यावसायिक तौर पर किया जा रहा था।

हालांकि, दोनों आरोपियों की ओर से पेश हुए वकील सतीश मानेशिंदे ने कहा कि आरोपियों ने स्वीकार कर लिया है कि उन्होंने ही दस्तावेज तैयार किए थे और इसमें कोई तीसरा व्यक्ति शामिल नहीं था, इसलिए किसी और बात का पता लगाने के लिए आगे हिरासत की जरूरत नहीं है।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि हिरासत बढ़ाने के लिए पेश की गई रिपोर्ट में जो आधार बताए गए हैं, उनपर गौर करने के बाद आगे की पुलिस हिरासत उचित प्रतीत नहीं होती।

इसके बाद अदालत ने आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

यह घटना सात सितंबर को बीकेसी स्थित जियो वर्ल्ड प्लाजा मॉल में हुई थी। इसके एक दिन बाद पास स्थित नीता मुकेश अंबानी सांस्कृतिक केंद्र के ‘ग्लोबल फिनटेक फेस्ट’ 2026 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का कार्यक्रम निर्धारित था।

पारिख को फर्जी पीएमओ कार्ड के साथ गिरफ्तार किया गया था। उसके साथ मौजूद कुंडे के पास हथियार मिला था और इसी को लेकर दोनों और मॉल के सुरक्षा कर्मचारियों के बीच बहस हुई थी।

बहस के दौरान पारिख ने खुद को कथित तौर पर पीएमओ का अधिकारी बताया था।

बाद में पुलिस ने स्पष्ट किया कि इस घटना का अगले दिन होने वाले प्रधानमंत्री के कार्यक्रम से कोई संबंध नहीं था।

भाषा जोहेब माधव

माधव


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