मुंबई: महाराष्ट्र राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने बाल विवाह पर रोक लगाने के लिए राज्य सरकार को महत्वपूर्ण सिफारिश करने का निर्णय लिया है। आयोग का सुझाव है कि शादी के निमंत्रण पत्रों पर दूल्हा और दुल्हन की जन्मतिथि का उल्लेख अनिवार्य किया जाए, ताकि नाबालिग विवाह की पहचान आसानी से हो सके। (Dates of Birth on Wedding Cards) साथ ही, बाल विवाह और बाल यौन शोषण के खिलाफ पूरे राज्य में जागरूकता अभियान तेज करने पर भी जोर दिया गया है।
आयोग ने राजस्थान की तर्ज पर इस व्यवस्था को लागू करने की बात कही है। आयोग के सदस्य संजय लाखे पाटिल ने बताया कि सोलापुर जिले में नाबालिग लड़कियों के मां बनने के संदिग्ध मामलों की जांच के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने इस स्थिति को बाल अधिकारों का गंभीर उल्लंघन बताया और इसे अत्यंत संवेदनशील मामला करार दिया।
संजय विष्णु पुराणिक की अध्यक्षता में 23 अप्रैल को हुई सुनवाई में आयोग ने मामलों की समीक्षा की और जिला प्रशासन को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। प्रारंभिक जांच में बाल विवाह और यौन शोषण के संकेत मिले हैं, साथ ही स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों और अन्य विभागों की लापरवाही भी सामने आई है।
आयोग ने सभी जिलों में जिलाधिकारियों के नेतृत्व में संयुक्त टीम गठित करने के निर्देश दिए हैं, जिसमें महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य, पुलिस और शिक्षा विभाग के अधिकारी शामिल होंगे। इस टीम को 85 मामलों की विस्तृत जांच कर जिम्मेदारी तय करने और कड़ी कार्रवाई की सिफारिश करने को कहा गया है। (Dates of Birth on Wedding Cards) साथ ही, दोषियों पर बाल यौन अपराध संरक्षण अधिनियम, 2012 और बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के तहत कार्रवाई करने और एक से डेढ़ महीने में ठोस कार्ययोजना प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।