Ghooskhor Pandat Contoversy: फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ पर बवाल! मेकर्स ने हटाए पोस्टर-टीज़र, विवाद पर डायरेक्टर नीरज पांडे ने तोड़ी चुप्पी, कह दी ये बड़ी बात
Ghooskhor Pandat Contoversy: फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ पर बवाल! मेकर्स ने हटाए पोस्टर-टीज़र, विवाद पर डायरेक्टर नीरज पांडे ने तोड़ी चुप्पी, कह दी ये बड़ी बात
Ghooskhor Pandat Contoversy/Image Source: Social Media
- फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ पर विवाद
- डायरेक्टर नीरज पांडे ने जारी किया बयान
- कहा- यह एक फिक्शनल कॉप ड्रामा है
मुंबई: Ghooskhor Pandat Contoversy: फिल्म ‘घूसखोर पंडत ’ के शीर्षक को लेकर उठे विवाद के बीच डायरेक्टर नीरज पांडे ने अपना आधिकारिक बयान जारी किया है। उन्होंने साफ किया कि उनकी यह फिल्म पूरी तरह से एक फिक्शनल कॉप ड्रामा है और इसका उद्देश्य किसी समुदाय या वर्ग की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है।
टाइटल पर बवाल के बाद झुके नीरज पांडे (Neeraj Pandey Statement)
Ghooskhor Pandat Contoversy: नीरज पांडे ने कहा कि फिल्म के शीर्षक में इस्तेमाल किया गया पंडत शब्द बोलचाल में इस्तेमाल होने वाले एक नाम के तौर पर लिया गया है, न कि किसी धार्मिक या सामाजिक पहचान के रूप में। उन्होंने स्वीकार किया कि फिल्म के टाइटल से कुछ दर्शकों की भावनाएं आहत हुई हैं। डायरेक्टर ने अपने बयान में कहा कि हम दर्शकों की भावनाओं और उनकी चिंताओं को पूरी तरह समझते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए हमने फिलहाल फिल्म से जुड़े सभी प्रमोशनल मटेरियल को हटाने का फैसला लिया है। उन्होंने आगे कहा कि किसी भी फिल्म को उसके पूरे कंटेंट और कहानी के कॉन्टेक्स्ट में देखा जाना चाहिए न कि उसके कुछ हिस्सों या नाम के आधार पर जज किया जाना चाहिए।
Director Neeraj Pandey issues official statement on his film ‘Ghooskhor Pandat’, says, “Our film is a fictional cop drama, and the term “Pandat” is used simply as a colloquial name for a fictional character… We understand that the title of the film has caused hurt to some… pic.twitter.com/LKCucpceWt
— ANI (@ANI) February 6, 2026
घूसखोर पंडत’ फिल्म के खिलाफ ब्राह्मण समाज लामबंद (Ghooskhor Pandit Movie)
Ghooskhor Pandat Contoversy: बता दें कि एक ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज होने वाली ‘घूसखोर पंडत’ फिल्म के खिलाफ ब्राह्मण समाज लामबंद हुआ। अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज मध्यप्रदेश ने- फिल्म के टाइटल और डायलॉग को लेकर आपत्ति जताते हुए विरोध प्रदर्शन किया। फिल्म के एक्टर, डायरेक्टर और ओटीटी की डायरेक्टर के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की। उनका आरोप है कि फिल्म का नाम जानबूझकर ब्राह्मणों को अपमानित करने वाला रखा गया है। ब्राह्मणों को खलनायक के तौर पर पेश करने की संगठित मुहिम बर्दाश्त से बाहर है तो प्रसिद्ध कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने इसे वोटबैंक की राजनीति बताया। जहां ब्राह्मण समाज और कथावाचक इसे सामाजिक सद्भाव को तोड़ने वाला बता रहे हैं..तो राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी संज्ञान लिया, वैमन्यस्ता फैलाने वाला बताते हुए नोटिस जारी करने की बात कही और ‘घूसखोर पंडत’ को लेकर कांग्रेस-बीजेपी भी आमने-सामने हैं। कुलमिलाकर ‘घूसघोर पंडत’ मूवी को लेकर हर ओर से आक्रोश की लहर देखने को मिल रही हैं, लेकिन ये पहली बार नहीं है जब बॉलीवुड की फिल्मों, वेबसीरीज में ब्राह्मणों को टारगेट करने वाली चीजें सामने आई हों। इससे पहले भी पंडितों, ब्राह्मणों को खलनायक के तौर पर दिखाया जाता रहा है।

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