Mohan Bhagwat on Resign: ‘जब भी आरएसएस कहे, इस्तीफा दे दूंगा’, RSS प्रमुख मोहन भागवत ने बड़ा बयान, खुद बताई पूरी सच्चाई

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Mohan Bhagwat on Resign: 'जब भी आरएसएस कहे, इस्तीफा दे दूंगा', RSS प्रमुख मोहन भागवत ने बड़ा बयान, खुद बताई पूरी सच्चाई

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  • Publish Date - February 8, 2026 / 02:50 PM IST,
    Updated On - February 8, 2026 / 02:51 PM IST

Mohan Bhagwat on Resign/Image Source: RSS

HIGHLIGHTS
  • मोहन भागवत ने किया बड़ा खुलासा
  • 75 साल के बाद भी संघ में काम जारी
  • पद छोड़ने की बात संघ करेगा तय- मोहन भागवत

मुंबई: Mohan Bhagwat on Resign:  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को कहा कि अगर संघ उन्हें पद से हटने के लिए कहेगा तो वह इस्तीफा दे देंगे और इस संगठन ने ही उनसे उनकी उम्र के बावजूद काम जारी रखने के लिए कहा है। वह आरएसएस शताब्दी समरोह के उपलक्ष्य में आयोजित एक कार्यक्रम में उपस्थित लोगों के साथ एक संवादात्मक सत्र के दौरान प्रश्नों का उत्तर दे रहे थे।

अगर संघ कहेगा तो मैं तुरंत छोड़ दूँगा पद: मोहन भागवत (Mohan Bhagwat statement)

Mohan Bhagwat on Resign: भागवत ने कहा कि आरएसएस प्रमुख के पद के लिए कोई चुनाव नहीं होता। क्षेत्रीय और मंडल प्रमुख ही संघ प्रमुख की नियुक्ति करते हैं। आम तौर पर कहा जाता है कि 75 वर्ष की आयु के बाद किसी को कोई पद धारण किए बिना काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मैंने 75 वर्ष पूरे कर लिए और मैंने आरएसएस को इसकी सूचना भी दे दी थी, लेकिन संगठन ने मुझसे काम जारी रखने को कहा। जब भी आरएसएस मुझसे पद छोड़ने को कहेगा, मैं पद छोड़ दूंगा लेकिन काम से सेवानिवृत्ति कभी नहीं होगी।’ आरएसएस प्रमुख ने कहा कि परिस्थितियां सहायक या प्रतिकूल हो सकती हैं और उन पर अत्यधिक ध्यान देने की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि हमें समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय समाधान खोजने पर ध्यान देना चाहिए। जब ​​तक सच्चाई सामने नहीं आती, भ्रम बना रहता है।’

संघ का काम चुनाव प्रचार नहीं, संस्कार फैलाना है: भागवत (Mohan Bhagwat News)

Mohan Bhagwat on Resign: भागवत ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि संगठन ‘अपने स्वयंसेवकों से खून के आखिरी कतरे तक काम निकलवाता है और उन्होंने दावा किया कि आरएसएस के इतिहास में अब तक ऐसी कोई स्थिति नहीं आई है जब किसी को सेवानिवृत्त करना पड़ा हो। उन्होंने कहा कि संघ का काम संस्कारों को बढ़ावा देना है, न कि चुनाव प्रचार करना। उन्होंने कहा हम अपने प्रचार-प्रसार में पिछड़ गए हैं। अत्यधिक प्रचार से प्रसिद्धि तो मिलती है, लेकिन फिर अहंकार भी आ जाता है। इससे बचाव करना जरूरी है। प्रचार बारिश की तरह होना चाहिए, यानी समय और मात्रा दोनों में उचित होना चाहिए।’’ उन्होंने कहा कि आरएसएस जनसंपर्क अभियान चला रहा है।

भागवत ने कहा कि आरएसएस के कामकाज में अंग्रेजी कभी भी संचार का माध्यम नहीं होगी क्योंकि यह भारतीय भाषा नहीं है। उन्होंने कहा कि हम भारतीयों के साथ काम करना चाहते हैं। जहां भी अंग्रेजी आवश्यक होगी, हम उसका उपयोग करेंगे। हमें इससे कोई आपत्ति नहीं है। संघ प्रमुख ने कहा कि लोगों को इस तरह से अंग्रेजी बोलनी आनी चाहिए कि अंग्रेजी भाषी लोग उसे सुनना चाहें। भागवत ने कहा, ‘‘हमें अंग्रेजी में महारत हासिल करनी चाहिए, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम अपनी मातृभाषा को भूल जाएं।’’

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मोहन भागवत ने आरएसएस पद से इस्तीफा कब देने की बात कही?

A: मोहन भागवत ने कहा कि जब भी संघ उन्हें पद छोड़ने के लिए कहेगा, वह इस्तीफा दे देंगे, लेकिन काम से सेवानिवृत्ति कभी नहीं होगी।

मोहन भागवत ने आरएसएस के प्रचार और काम के बारे में क्या कहा?

A: उन्होंने कहा कि संघ का काम संस्कारों को बढ़ावा देना है, न कि चुनाव प्रचार करना। प्रचार संतुलित और समयानुसार होना चाहिए।

: आरएसएस में अंग्रेजी भाषा के उपयोग पर मोहन भागवत का क्या विचार है?

A: भागवत ने कहा कि अंग्रेजी कभी भी संघ के कामकाज का मुख्य माध्यम नहीं होगी। मातृभाषा के साथ-साथ अंग्रेजी में भी महारत जरूरी है, ताकि अंग्रेजी भाषी लोग इसे सुनना पसंद करें।