महाराष्ट्र में एसआईआर के बाद तीन करोड़ मतदाताओं के नाम हट सकते हैं: रोहित पवार का दावा

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महाराष्ट्र में एसआईआर के बाद तीन करोड़ मतदाताओं के नाम हट सकते हैं: रोहित पवार का दावा

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  • Publish Date - September 27, 2026 / 02:17 PM IST,
    Updated On - September 27, 2026 / 02:17 PM IST

मुंबई, 27 सितंबर (भाषा) राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार ने रविवार को दावा किया कि महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में हटाए गए मतदाताओं की संख्या मौजूदा 2.07 करोड़ से बढ़कर करीब तीन करोड़ तक पहुंच सकती है।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए पवार ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पहले निर्वाचन क्षेत्रों के स्तर पर इस्तेमाल की जाने वाली चुनावी शक्तियों को अब निर्वाचन आयोग के पास केंद्रीकृत कर दिया गया है, जिससे दिल्ली से मतदाताओं के नाम जोड़े या हटाए जा सकते हैं।

पवार ने आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर बूथ स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) ने मतदाताओं के भौतिक सत्यापन के बजाय ‘‘टेबल सर्वे’’ किया और जानकारी भाजपा कार्यकर्ताओं की ओर से दी जा रही थी।

उन्होंने दावा किया कि पुणे, नासिक और ठाणे में ऐसे मामले सामने आए हैं और चुनाव अधिकारियों को शिकायत किए जाने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर सवाल उठाया।

पवार ने कहा, ‘‘जांच के दायरे में आए 1.22 करोड़ मतदाताओं में से कुछ लोगों को निश्चित रूप से अयोग्य ठहराया जाएगा और हटाए गए 2.07 करोड़ मतदाताओं की संख्या और बढ़ सकती है तथा यह तीन करोड़ तक भी पहुंच सकती है।’’

एसआईआर प्रक्रिया के दौरान जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र में 9.78 करोड़ पंजीकृत मतदाता हैं, जबकि प्रक्रिया के दौरान 2.07 करोड़ मतदाताओं से जुड़े गणना फॉर्म एकत्र नहीं हो सके। अधिकारियों ने ऐसे मामलों का कारण मतदाताओं की मृत्यु, उनका पता नहीं चल पाना, स्थायी रूप से स्थानांतरित हो जाना या एक से अधिक प्रविष्टियां होना बताया है।

पवार ने दावा किया कि बड़ी संख्या में बाहर किए गए या सत्यापित नहीं हो सके मतदाताओं ने चिंता पैदा की है। उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड की जांच के दायरे में आए 1.22 करोड़ मतदाताओं में से भी बड़ी संख्या में लोगों के नाम अंततः मतदाता सूची से बाहर किए जा सकते हैं।

विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया के बाद भी मतदाता रिकॉर्ड में गलतियां बनी हुई हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ मामलों में जीवित लोगों को मृत दिखाया गया है और कुछ मतदाता रिकॉर्ड में तस्वीर तथा लैंगिक विवरण मेल नहीं खाते।

उन्होंने दावा किया कि जारी एसआईआर प्रक्रिया और परिसीमन संविधान तथा लोकतंत्र के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। उन्होंने विपक्षी दलों, सामाजिक संगठनों और नागरिकों से मतदान के अधिकार और आरक्षण की रक्षा के लिए एकजुट होने की अपील की।

भाषा शोभना रंजन

रंजन