मुंबई, 18 जुलाई (भाषा) राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के 72वें संस्करण के विजेताओं में शुमार अभिनेता रणदीप हुड्डा, संजय मिश्रा और अन्य कलाकारों ने अपने काम को मिली इस मान्यता के लिए आभार जताया।
रणदीप हुड्डा को फिल्म ‘स्वातंत्र्य वीर सावरकर’ के लिए सर्वश्रेष्ठ पदार्पण निर्देशक का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार देने की घोषणा की गई। उन्होंने अपनी टीम के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उसने उन पर भरोसा किया और अच्छे-बुरे हर दौर में उनका साथ दिया।
‘स्वातंत्र्य वीर सावरकर’ के अभिनेता और निर्देशक हुड्डा ने एक बयान में कहा, ‘यह सम्मान हम सभी का है। मुझे उम्मीद है कि इससे ज्यादा से ज्यादा लोग, खासकर युवा पीढ़ी, वीर सावरकर की विरासत को जानने और उस पर विचार करने के लिए प्रेरित होंगे।’
संजय मिश्रा को फिल्म ‘भक्षक’ में अभिनय के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार देने की घोषणा की गई है। भूमि पेडनेकर अभिनीत इस फिल्म में एक आश्रय गृह में बच्चों के यौन शोषण की कहानी दिखाई गई है।
मिश्रा ने बताया कि उन्हें इस सम्मान की जानकारी पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) से मिली, जहां उनके दिवंगत पिता काम करते थे।
वरिष्ठ अभिनेता ने कहा, ‘राष्ट्रीय पुरस्कार मिलना मेरे लिए बहुत बड़ा सम्मान है। इसने मेरे दिल को छू लिया।’
‘भक्षक’ में एक स्थानीय समाचार चैनल के कैमरामैन की भूमिका निभाने वाले मिश्रा ने कहा कि उन्होंने हमेशा हर किरदार को पूरी ईमानदारी से निभाया है।
भूमि पेडनेकर ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर मिश्रा को बधाई दी।
उन्होंने लिखा, ‘मेरे प्यारे संजय मिश्रा जी, आप बहुत खास और अद्भुत इंसान हैं। आपके साथ काम करना हमेशा सम्मान की बात होती है। मन प्रफुल्लित है।’
राजकुमार राव की फिल्म ‘श्रीकांत – आ रहा है सबकी आंखें खोलने’ को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार देने की घोषणा की गई है। इसका निर्देशन तुषार हीरानंदानी ने किया है, जबकि निर्माता भूषण कुमार, कृष्ण कुमार और निधि परमार हीरानंदानी हैं।
यह फिल्म उद्योगपति श्रीकांत बोला के जीवन पर आधारित है, जिसमें दिखाया गया है कि दृष्टिबाधित होने के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को हकीकत में बदला और ‘बोलेंट इंडस्ट्रीज’ की स्थापना की।
निर्देशक तुषार हीरानंदानी ने कहा कि यह पुरस्कार श्रीकांत बोला के प्रेरणादायक जीवन और पूरी टीम की मेहनत को समर्पित है।
उन्होंने कहा, ‘फिल्म ‘श्रीकांत’ बनाना मेरे करियर के सबसे संतोषजनक अनुभवों में से एक रहा। यह पुरस्कार श्रीकांत बोला के प्रेरक जीवन और इस कहानी को दिल से पर्दे पर उतारने वाली पूरी टीम को समर्पित है।’
भूषण कुमार ने कहा कि यह सम्मान पूरी टीम के लिए गर्व की बात है और इसका श्रेय उद्योगपति श्रीकांत बोला की प्रेरक कहानी को जाता है।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने शनिवार को इन पुरस्कारों की घोषणा की। ये पुरस्कार वर्ष 2024 में प्रमाणित फिल्मों के लिए दिए गए हैं।
भाषा जोहेब संतोष
संतोष