(अपराजिता उपाध्याय)
नयी दिल्ली, 18 जुलाई (भाषा) भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) ने शनिवार को यह सुनिश्चित किया कि राष्ट्रमंडल खेलों में हिस्सा लेने जा रही 16 वर्षीय पैरा साइकिलिस्ट लीशा दास के साथ ग्लासगो में एक महिला सहयोगी स्टाफ सदस्य मौजूद रहेगी।
लीशा ने पहले इस संबंध में चिंता जताई थी। भारत के दल की सबसे कम उम्र की खिलाड़ी और राष्ट्रमंडल खेलों के लिए क्वालीफाई करने वाली एकमात्र पैरा ट्रैक साइकिलिस्ट लीशा ने शिकायत की थी कि उनके साथ न तो उनके निजी कोच को और न ही किसी महिला सहयोगी स्टाफ को भेजा जा रहा है।
राष्ट्रमंडल खेलों की शुरुआत बृहस्पतिवार से ग्लास्गो में होगी।
यह मामला सामने आने के बाद भारत के दल प्रमुख रोहित राजपाल ने कहा, ‘‘जैसे ही हमें इस मुद्दे की जानकारी मिली, हमने तुरंत संज्ञान लिया और लीशा की मांग के अनुसार महिला फिजियोथेरेपिस्ट की व्यवस्था कर दी। ’’
उन्होंने कहा, ‘‘हर खिलाड़ी की सुरक्षा, भलाई और सम्मान से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। हम सभी खिलाड़ियों को सुरक्षित और सहयोगपूर्ण माहौल उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। ’’
असम की रहने वाली लीशा महिला सी5 वर्ग में प्रतिस्पर्धा करती हैं। उनके दाहिने हाथ में शारीरिक विकृति है। उन्होंने अपने निजी कोच, एक महिला फिजियोथेरेपिस्ट और एक तकनीशियन सहित तीन सदस्यीय सहयोगी टीम की मांग की थी।
भारतीय साइकिलिंग महासंघ ने पहले उनके निजी कोच आदित्य मेहता और के दत्तात्रेय सहित तीन सहयोगी स्टाफ के नाम भेजे थे। अब आईओए ने लीशा के माता-पिता की सहमति से फिजियोथेरेपिस्ट आशा शेख का मान्यता पत्र (एक्रिडिटेशन) भी सुनिश्चित कर दिया है, ताकि वह ग्लास्गो में उनके साथ रह सकें।
आदित्य मेहता को भी मान्यता मिल चुकी है जबकि तकनीशियन के लिए भी मान्यता पत्र दिलाने की कोशिश जारी है। पैरा साइकिलिंग में तकनीशियन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है क्योंकि प्रतियोगिता से पहले साइकिल में विशेष तकनीकी सेटिंग और समायोजन करना आवश्यक होता है।
खेल मंत्रालय द्वारा मंजूर भारतीय दल में कुल 191 सदस्य हैं जिनमें 126 खिलाड़ी, 51 अधिकारी और 14 अन्य सहयोगी सदस्य शामिल हैं।
महिला खिलाड़ियों वाले लगभग सभी खेलों में महिला कोच, फिजियोथेरेपिस्ट या मेडिकल स्टाफ मौजूद है, लेकिन साइकिलिंग और पैरा साइकिलिंग ऐसे दो खेल थे जिसमें महिला सहयोगी स्टाफ नहीं था।
यह स्थिति भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) के दिशा-निर्देशों के भी विपरीत थी, जिनके अनुसार महिला खिलाड़ियों वाले किसी भी राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय दल में कम से कम एक महिला कोच या महिला सहयोगी स्टाफ का होना अनिवार्य है।
भाषा नमिता आनन्द
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