मुंबई, 29 जनवरी (भाषा) महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की विमान दुर्घटना में मौत के एक दिन बाद, उनकी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेताओं ने उनकी पत्नी सुनेत्रा को राज्य मंत्रिमंडल में स्थान देने की मांग उठाई है।
वहीं विपक्षी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) ने इस बात का संकेत दिया है कि वह प्रतिद्वंद्वी गुटों के विलय के प्रयासों को आगे बढ़ाने का स्वागत करेगी।
राकांपा के नेताओं ने यह भी सुझाव दिया कि सुनेत्रा पवार को आगे आकर पार्टी का नेतृत्व करना चाहिए।
अजित पवार की राकांपा राज्य में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन का हिस्सा है जिसमें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना भी शामिल हैं। सुनेत्रा पवार वर्तमान में राज्यसभा सदस्य हैं।
राकांपा के वरिष्ठ नेता एवं महाराष्ट्र में कैबिनेट मंत्री नरहरि झिरवाल ने बृहस्पतिवार को कहा कि जनता चाहती है कि दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को राज्य मंत्रिमंडल में शामिल किया जाए।
अजित पवार की असामयिक मृत्यु के बाद राकांपा के भविष्य के बारे में पूछे जाने पर झिरवाल ने कहा कि लोग चाहते हैं कि ‘वहिनी’ (यानी भाभी सुनेत्रा पवार) को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाए।
अजित पवार के करीबी विश्वासपात्र रहे झिरवाल ने बारामती में पार्टी प्रमुख के अंतिम संस्कार के बाद एक समाचार चैनल से कहा, ‘‘हम इस बारे में नेतृत्व से बात करेंगे और फैसला लेंगे।’’
राकांपा के दोनों गुटों के विलय के संबंध में पूछे गए सवाल पर झिरवाल ने कहा, ‘‘दोनों गुट पहले से ही एक हैं (स्थानीय निकाय चुनाव के लिये)। सभी को यह एहसास हो गया है कि बिखरे रहने का कोई फायदा नहीं है और एकजुट होना ही होगा।’’
राकांपा नेता और पूर्व मंत्री नवाब मलिक ने इस बात पर जोर दिया कि विलय पर अंतिम निर्णय अजित पवार और शरद पवार द्वारा लिया जाना था।
मलिक ने कहा, “अभी मैं यह भविष्यवाणी नहीं कर सकता कि राजनीति किस रूप में आगे बढ़ेगी। लेकिन यह सबकी इच्छा है कि पूरा परिवार और दोनों पार्टियां एक साथ आएं।”
राकांपा के एक अन्य नेता और अजित पवार के करीबी प्रमोद हिंदुराव ने कहा कि सुनेत्रा पवार को अपने पति की विरासत को आगे बढ़ाना चाहिए और पार्टी कार्यकर्ताओं का ध्यान रखना चाहिए।
सुनेत्रा ने 2024 के लोकसभा चुनाव में बारामती सीट से राकांपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें राकांपा (शप) की कार्यकारी अध्यक्ष और शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले से हार का सामना करना पड़ा था।
राकांपा नेता और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि जब अजित पवार के अचानक निधन से हर कोई सदमे में है, तब राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा करना जल्दबाजी होगी।
राकांपा (शप) नेता एकनाथ खडसे ने दावा किया कि शरद पवार की सहमति से ढाई महीने के विचार-विमर्श के बाद दोनों गुटों के विलय का निर्णय लिया गया था।
उन्होंने कहा कि कई दौर की बातचीत हुई थी और आठ दिन पहले यह फैसला लिया गया था कि पांच फरवरी को होने वाले जिला परिषद चुनाव में राकांपा के घड़ी चिन्ह पर चुनाव लड़ा जाएगा।
नाम न छापने की शर्त पर एक अन्य राकांपा (शप) नेता ने कहा, “अब अचानक हुए घटनाक्रम के कारण विलय के मामले में क्या होगा, इस पर भ्रम की स्थिति है। स्पष्टता के लिए हमें कुछ दिनों तक इंतजार करना होगा।”
इस बीच, राज्य के राकांपा (शप) अध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि अजित पवार ने खुद महाराष्ट्र में महानगरपालिका और स्थानीय निकाय चुनावों के बाद राकांपा के दोनों गुटों के विलय पर एक साथ बैठकर निर्णय लेने की बात कही थी।
बुधवार को पुणे जिले के बारामती में चार्टर्ड विमान के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने से अजित पवार और चार अन्य लोगों की मृत्यु हो गई।
जुलाई 2023 में अजित पवार तत्कालीन एकनाथ शिंदे नीत राज्य सरकार में शामिल हुए थे, जिसके कारण उनके चाचा शरद पवार द्वारा स्थापित राकांपा में फूट पड़ गई थी।
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