नयी दिल्ली, 29 जनवरी (भाषा) जीएसटी सुधारों की अगली कड़ी में ई-वे बिल प्रणाली को केवल प्रवर्तन और नियंत्रण के माध्यम के बजाय सुगम लॉजिस्टिक सहायक के रूप में फिर से तैयार किया जा सकता है। लोकसभा में बृहस्पतिवार को पेश की गई आर्थिक समीक्षा में यह बात कही गई।
समीक्षा में इलेक्ट्रॉनिक मोहर (ई-सील्स) और इलेक्ट्रॉनिक लॉकिंग प्रणाली के व्यापक उपयोग का सुझाव दिया गया है। इन्हें ई-वे बिल और वाहन निगरानी तकनीकों के साथ जोड़ा जा सकता है। इससे सड़क पर नियमित रोक-टोक के बिना माल की सुरक्षित और शुरू से अंत तक निगरानी की जा सकेगी।
जमीनी स्तर पर प्रवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली राज्य सरकारें इस बदलाव के केंद्र में होंगी। उन्हें जोखिम आधारित और प्रणाली द्वारा दी गई चेतावनी का अनुसरण करना होगा और विवेकाधीन जांच को सीमित करना होगा।
समीक्षा में एक ऐसी नीति का सुझाव दिया गया है, जो भरोसे पर आधारित और तकनीक से संचालित अनुपालन मॉडल पर निर्भर हो। इसके तहत विश्वसनीय व्यापारी ढांचा तैयार किया जा सकता है। इसमें मजबूत अनुपालन रिकॉर्ड वाले करदाताओं को न्यूनतम भौतिक जांच का सामना करना पड़ेगा और माल की आवाजाही में अधिक निश्चितता मिलेगी।
समीक्षा में कहा गया, ‘‘ये सुधार लॉजिस्टिक पारिस्थितिकी तंत्र में एक बड़ी ढील साबित होंगे। इससे व्यापार के लिए लागत और देरी कम होगी, जबकि कर प्रशासन के लिए प्रभावी और बिना किसी बाधा वाली निगरानी बनी रहेगी।’’
माल एवं सेवा कर (जीएसटी ) लागू होने पर राज्यों की भौतिक जांच चौकी खत्म कर दी गई थी। यह एक बड़ा संरचनात्मक सुधार था, जिसने माल की मुक्त आवाजाही में सुधार किया।
भाषा पाण्डेय अजय
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