कूटनीतिक वार्ता विफल रहने के कारण भारत, पाकिस्तान के लोगों के बीच संपर्क की जरूरत: आंबेकर

कूटनीतिक वार्ता विफल रहने के कारण भारत, पाकिस्तान के लोगों के बीच संपर्क की जरूरत: आंबेकर

कूटनीतिक वार्ता विफल रहने के कारण भारत, पाकिस्तान के लोगों के बीच संपर्क की जरूरत: आंबेकर
Modified Date: June 17, 2026 / 04:54 pm IST
Published Date: June 17, 2026 4:54 pm IST

पुणे, 17 जून (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने भारत और पाकिस्तान के लोगों के बीच संपर्क की हिमायत करते हुए बुधवार को कहा कि अब तक दोनों देशों की सरकारों, सेनाओं और एजेंसियों के बीच हुई बातचीत ‘‘विफल’’ रही है।

पुणे श्रमजीवी पत्रकार संघ में संवाददाताओं से बातचीत के दौरान, आंबेकर ने यह भी कहा कि संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी दत्तात्रेय होसबाले और सरसंघचालक मोहन भागवत ने पूर्व में ‘पाकिस्तान के साथ बातचीत’ के बारे में जो टिप्पणियां की थीं, वे लोगों के बीच आपसी संपर्क के बारे में थीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये टिप्पणियां आधिकारिक राजनयिक बातचीत के बारे में नहीं थीं।

उन्होंने कहा, ‘‘सरसंघचालक (मोहन भागवत) की टिप्पणियां दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क के बारे में थीं। सरकारों को बातचीत करनी चाहिए या नहीं, यह कूटनीतिक विषय है, जिसमें राष्ट्रीय हित और कई संवेदनशील मुद्दे शामिल रहते हैं।’’

मई में ‘पीटीआई-वीडियो’ को दिए एक साक्षात्कार में संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी दत्तात्रेय होसबाले ने कहा था कि पाकिस्तानी सेना और राजनीतिक नेतृत्व पर भारत में बिल्कुल भी भरोसा नहीं है। उन्होंने यह भी कहा था कि गतिरोध को खत्म करने का सबसे अच्छा तरीका लोगों के बीच आपसी संपर्क है।

पाकिस्तान के साथ वार्ता की वकालत करने वाले संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी के बयानों का बचाव करते हुए, भागवत ने बाद में कहा था कि वह पड़ोसी देश के लोगों की बात कर रहे थे।

आंबेकर ने कहा कि विदेश नीति से जुड़े फैसले, विशेष रूप से टकराव या असाधारण हालात में, सरकार पर ही छोड़ देने चाहिए।

आरएसएस के प्रचार प्रमुख ने कहा कि जब दूसरे देशों से जुड़े मुद्दे सामने आते हैं, तो राजनीतिक मतभेदों को किनारे रखकर सरकार तक अपने विचार पहुंचाने चाहिए और सरकार को राष्ट्रीय हित में निर्णय लेना चाहिए।

आंबेकर ने कहा कि आरएसएस एक सामाजिक और सांस्कृतिक संगठन है, इसलिए जब भी जरूरत होगी, वह सरकार तक अपनी बात पहुंचाएगा।

भागवत की बातों को और स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों देशों की सरकारों, सेनाओं और एजेंसियों के बीच बातचीत के पारंपरिक तरीकों से अब तक वांछित परिणाम नहीं मिले हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘(दोनों देशों की) सरकारों, सेनाओं और एजेंसियों के बीच अब तक जो भी बातचीत हुई है, वह विफल रही है। हमने उम्मीद खो दी है… इसलिए, लोगों के बीच आपसी संपर्क की जरूरत है।’’

आंबेकर ने दोनों देशों के बीच जारी आदान-प्रदान, जैसे कि इलाज के लिए यात्रा और व्यापार का जिक्र किया और कहा कि इस तरह के मेल-जोल से साझा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक यादों को बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

उन्होंने बलूचिस्तान जैसे इलाकों की भावनाओं का भी ज़िक्र किया और कहा कि साझा इतिहास के बारे में अधिक जानकारी होने से लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों को सुलझाने में मदद मिल सकती है।

आंबेकर ने कहा, ‘‘लोगों के बीच बातचीत की बहुत जरूरत है और इसे जारी रहना चाहिए। इसे राजनीतिक कूटनीति के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।’’

बातचीत के दौरान उन्होंने कई अन्य मुद्दों पर भी बात की, जैसे कि जनसांख्यिकीय संतुलन, जनसंख्या नीतियां और मुस्लिम समुदाय तक पहुंच बनाना। उन्होंने कहा कि आरएसएस समाज के सभी वर्गों के साथ बातचीत के लिए तैयार है।

भाषा सुभाष नेत्रपाल

नेत्रपाल


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