Dr Kumarasamy Thangaraj Padma Shri: पत्नी के सहयोग और अथक मेहनत ने दिलाई पहचान, अब पद्मश्री से हुए सम्मानित, जानिए कौन है डॉ. कुमारस्वामी थंगराज

Dr Kumarasamy Thangaraj Padma Shri: पत्नी के सहयोग और अथक मेहनत ने दिलाई पहचान, अब पद्मश्री से हुए सम्मानित, जानिए कौन है डॉ. कुमारस्वामी थंगराज

Dr Kumarasamy Thangaraj Padma Shri: पत्नी के सहयोग और अथक मेहनत ने दिलाई पहचान, अब पद्मश्री से हुए सम्मानित, जानिए कौन है डॉ. कुमारस्वामी थंगराज

Dr Kumarasamy Thangaraj Padma Shri | Photo Credit: AI

Modified Date: June 17, 2026 / 02:16 pm IST
Published Date: June 17, 2026 2:16 pm IST
HIGHLIGHTS
  • डॉ. कुमारासामी थंगराज को वर्ष 2026 में पद्म श्री सम्मान से नवाजा गया
  • पत्नी के सहयोग मिली सफलताएं
  • प्रवासन और इतिहास पर शोध कर विज्ञान जगत को नई दिशा दी

नई दिल्ली: Dr Kumarasamy Thangaraj Padma Shri डॉ. कुमारासामी थंगराज को पद्म श्री (Padma Shri Award 2026) से सम्मानित किया गया। प्रख्यात आनुवंशिकीविद् के रूप में उन्होंने जनसंख्या एवं चिकित्सा आनुवंशिकी के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। भारतीय जनसंख्या की उत्पत्ति, प्रवासन और इतिहास पर उनके शोध ने विज्ञान जगत को नई दिशा दी।

Dr Kumarasamy Thangaraj Padma Shri भारतीय जीन की गु्थी सुलझाने वाले वैज्ञानिक डॉक्टर कुमार स्वामी तंगराज (Kumarasamy Thangaraj) जिन्हें वर्ष 2026 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। जीवन के अनेक रूपों को अपने में समेटे एक खेत में एक छोटे बच्चे के मन में जिज्ञासा का पहला बीज अंकुरित हुआ। यही जिज्ञासा आगे चलकर जीवन के रहस्यों को समझने की कुंजी बनी। लेकिन उनकी यह यात्रा तमिलनाडु के शांत गांव चेयूर से शुरू होकर हैदराबाद के वैज्ञानिक जगत तक पहुंची। जहां उन्होंने भारतीयों की अनुवांशिक कहानी को दुनिया के सामने रखा और उनकी अद्भुत विविधता का अध्ययन किया।

खेतों में मेंढक पकड़ने से शुरू हुआ सफर

डॉक्टर कुमार स्वामी तंगराज ने बताया कि ‘मुझे आज भी अपने सरकारी स्कूल के दिन याद है। जहां संसाधन बहुत सीमित थे। प्रयोग करने के लिए मुझे खुद खेतों में जाकर मेंढक और चूहे पकड़ने पड़ते थे। सेंटर फॉर सेलुलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी में मेरी यात्रा वर्ष 1993 में शुरू हुई। तब मैंने मद्रास विश्वविद्यालय से अपनी पीएचडी भी पूरी नहीं की थी। मेरी वैज्ञानिक यात्रा का पहला बड़ा पड़ाव तब आया जब मेरी टीम और मैंने यह महत्वपूर्ण आनुवंशिक प्रमाण प्रस्तुत किया कि अंडमान की जनजातियां लगभग 65,000 वर्ष पहले अफ्रीका से बाहर आने वाले पहले आधुनिक मानवों के वंशज हैं।’

पत्नी के सहयोग मिली सफलताएं

पूरी दुनिया का ध्यान इस ओर गया। जल्द ही हावर्ड मेडिकल स्कूल और कैंब्रिज जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञ उनके साथ काम करने के लिए आगे आए। उनकी आगे की शोध ने यह साबित किया कि हमारी विविधताओं के बावजूद सभी भारतीय एक गहरे साझा मूल से जुड़े हुए हैं। यही हमारी विविधता में एकता की सच्ची पहचान है। जनसंख्या विशिष्ट आनुवांशिक रोगों पर उनका शोध भविष्य में भारतीयों में आनुवांशिक बीमारियों की रोकथाम में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। डॉक्टर तंगराज कहते हैं कि यह सारी सफलताएं उनकी पत्नी के सहयोग के बिना संभव ही नहीं हो पाती।

देर रात तक काम किया काम

डॉक्टर तंगराज की पत्नी ने बताया कि ‘मैं ईश्वर की आभारी हूं कि उनके वर्षों के कठिन परिश्रम को एक ही वर्ष में तीन प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मान मिला। हम दोनों सीएसआईआर सीसीएमबी में कार्यरत हैं। पर हमने वैवाहिक जीवन के 28 खूबसूरत वर्ष साथ में बिताए हैं। जब दुनिया सो रही होती थी तब भी वे अक्सर प्रयोगशाला में देर रात तक काम करते रहते थे।’

जिज्ञासा दुनिया को बेहतर बनाने की शक्ति

यह दंपति दो संतानों से धन्य है और अपनी व्यस्तताओं के बावजूद परिवार के साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताना हमेशा उनकी प्राथमिकता रही है। यह मानना है कि युवा वैज्ञानिकों को कड़ी मेहनत करनी चाहिए और अन्य क्षेत्रों के विशेषज्ञों के साथ मिलकर काम करना चाहिए। यही बात समस्या समाधान को रोचक और प्रभावशाली बनाती है और इसी से देश भी गौरवान्वित होता है। डॉक्टर कुमारस्वामी दंगराज की प्रेरणादायक यात्रा इस बात का प्रमाण है कि जिज्ञासा वास्तव में दुनिया को बेहतर बनाने की शक्ति रखती है।

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