प्रधान के इस्तीफे से खत्म नहीं होगा नीट प्रश्नपत्र लीक विवाद: शिवसेना (उबाठा)

प्रधान के इस्तीफे से खत्म नहीं होगा नीट प्रश्नपत्र लीक विवाद: शिवसेना (उबाठा)

प्रधान के इस्तीफे से खत्म नहीं होगा नीट प्रश्नपत्र लीक विवाद: शिवसेना (उबाठा)
Modified Date: July 27, 2026 / 03:28 pm IST
Published Date: July 27, 2026 3:28 pm IST

मुंबई, 27 जुलाई (भाषा) शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने सोमवार को दावा किया कि राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) प्रश्नपत्र लीक का मामला केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से खत्म नहीं होगा। पार्टी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार देश को नुकसान पहुंचा रही है।

पार्टी ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में छपे तीखे संपादकीय में सरकार के प्रस्तावित लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 विधेयक को महज छलावा करार दिया। पार्टी का आरोप है कि यह कानून पहले जैसा ही है, बस जुर्माने और सजा के आंकड़ों में बदलाव किया गया है।

संपादकीय में कहा गया कि इन कॉकरोच के आगे क्या झुकना, यह नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार का शुरुआत से ही रुख था।

संपादकीय के अनुसार ‘‘अहंकारी’’ सरकार ने कॉकरोच पर लाठीचार्ज किया और उन पर बंदूकें तानीं लेकिन देश के युवाओं ने जंतर-मंतर नहीं छोड़ा।

संपादकीय में दावा किया गया, ‘‘धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से यह मामला खत्म नहीं होगा। ‘बड़े प्रधान’ (प्रधानमंत्री मोदी) और उनके प्रशासन का कामकाज देश के लिए नुकसानदेह रहा है। गृह मंत्री अमित शाह के हाथ खून से सने हैं और जनता का गुस्सा उन पर भी फूटेगा।’’

संपादकीय में यह भी आरोप लगाया गया कि ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026’ में प्रश्नपत्र लीक के मामलों में 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रस्ताव है, जो वास्तव में पुराने कानून जैसा ही है बस इसमें जुर्माने और सजा के आंकड़े में बदलाव कर इसे और सख्त किया गया है।

पार्टी का आरोप है कि यह विधेयक छात्रों और उनके माता-पिता को मूर्ख बनाने का एक तरीका है।

दिल्ली में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (कॉजपा) के हफ्तों चले आंदोलन के बाद शनिवार को प्रधान ने इस्तीफा दे दिया। इस आंदोलन ने परीक्षाओं में गड़बड़ी और नीट प्रश्नपत्र लीक के मुद्दों पर लाखों लोगों को एकजुट करने का काम किया।

सरकार द्वारा कॉजपा की अन्य मांगों को मान लेने के बाद पार्टी ने आंदोलन वापस ले लिया। इन मांगों में आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को ‘‘सम्मानजनक’’ मुआवजा देना और दिल्ली एवं भारतीय जनता पार्टी शासित अन्य राज्यों में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकियों को वापस लेना शामिल था।

विपक्षी पार्टी ने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी और शाह मजाक का पात्र बन गए हैं क्योंकि युवाओं ने सरकार की आलोचना करने के लिए रचनात्मक नारे और मीम का सहारा लिया।

पार्टी ने कहा कि कॉजपा के आंदोलन के दौरान युवाओं की रचनात्मकता और डिजिटल तकनीक को नए पंख लग गए थे।

पार्टी ने कहा कि 20 छात्रों की आत्महत्याओं ने आक्रोश को भड़काया और देश को एकजुट किया, जिसके कारण युवा प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर उतर आए।

पार्टी ने दावा किया कि शाह ने छात्रों पर लाठीचार्ज का आदेश दिया और जरूरत पड़ने पर गोली चलाने के भी आदेश दिए थे।

पार्टी ने कहा कि गृह मंत्री जवाबदेही से बच नहीं सकते और प्रधानमंत्री मोदी को अंततः अपने ‘‘अमानवीय’’ कृत्यों के लिए देश से माफी मांगनी होगी।

भाषा सुरभि नरेश

नरेश


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