ठाणे, 17 अप्रैल (भाषा) महाराष्ट्र के ठाणे की एक विशेष अदालत ने पांच साल पहले एक महिला मरीज की गरिमा को ठेस पहुंचाने के आरोप में दोषी पाए जाने के बाद 33 वर्षीय पुरुष नर्सिंग सहायक को दो साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
हालांकि, विशेष न्यायाधीश रूबी यू मालवंकर ने बृहस्पतिवार को इमरान समीउल्लाह अहमद के खिलाफ बाल यौन अपराध संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत लगाए गए आरोपों को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि शिकायतकर्ता उस समय नाबालिग थी।
अदालती दस्तावेजों के अनुसार, यह घटना 12 सितंबर, 2020 को घटी, जब शिकायतकर्ता को उसके छोटे भाई की बिजली का करंट लगने से हुई मौत के कारण हुए मानसिक आघात के बाद एक निजी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया था।
समीउल्लाह ने रक्तचाप की जांच के बहाने महिला के साथ छेड़छाड़ की, जिसके बाद शिकायतकर्ता ने शोर मचाया। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
अदालत ने कहा, ‘‘आरोपी का काम मरीजों की देखभाल करना था, न कि उनकी चिकित्सीय स्थिति का फायदा उठाकर उनका यौन उत्पीड़न करना।’’
अदालत ने उसे दो साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई।
बहरहाल, न्यायाधीश मालवंकर ने समीउल्लाह के खिलाफ पॉक्सो के तहत आरोपों पर विचार करने से इनकार करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष यह निर्णायक रूप से साबित नहीं कर सका कि शिकायतकर्ता उस समय नाबालिग था।
अदालत ने दोषी पर 5,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया।
भाषा तान्या गोला
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