मुंबई, 24 मार्च (भाषा) महाराष्ट्र सरकार के अधूरे आश्वासनों की संख्या बढ़कर 5,200 से अधिक हो गई है। सरकारी आश्वासनों पर गठित विधायी समिति ने मंगलवार को समीक्षा बैठकों में देरी और अधिकारियों की अनुपस्थिति पर चिंता जताई।
समिति के अध्यक्ष रवि राणा ने राज्य विधानसभा में कहा कि विधानसभा सत्रों के दौरान मंत्रियों द्वारा दिए गए कई आश्वासन पूरे नहीं हुए हैं और उन्होंने जवाबदेही की आवश्यकता पर बल दिया।
राणा ने कहा, ‘‘मंत्रियों द्वारा दिए गए आश्वासन जनता के लिए महत्वपूर्ण हैं। अधिकारियों को ऐसी बैठकों में गंभीरता से भाग लेना चाहिए। यदि अधिकारी अनुपस्थित रहते हैं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।’’
विधानसभा में समिति की पहली रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 के विधानसभा सत्र के दौरान दिए गए 1,188 आश्वासनों में से 491 मामलों में निर्णय लिए जा चुके हैं, जबकि 53 मामले संभागीय स्तर पर लंबित हैं।
राणा ने कहा कि कुल 5,204 आश्वासन सरकार के पास लंबित हैं।
भाजपा के वरिष्ठ नेता सुधीर मुनगंटीवार ने आरोप लगाया कि कुछ सरकारी अधिकारी मंत्रियों को प्रभावित करते हैं और विधायी कार्यवाही के दौरान दिए गए आश्वासनों को वापस लेने के लिए दबाव डालते हैं। उन्होंने दावा किया कि स्वयंभू धर्मगुरु अशोक खरात ही नहीं, बल्कि कुछ अन्य अधिकारी भी मंत्रियों को प्रभावित करने में शामिल हैं।
नासिक निवासी खरात, जो खुद को मर्चेंट नेवी का सेवानिवृत्त अधिकारी बताता है, को 35 वर्षीय महिला की शिकायत पर बलात्कार और अन्य अपराधों के आरोप में 18 मार्च को गिरफ्तार किया गया था।
विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने कहा कि राणा और मुनगंटीवार द्वारा उठाए गए मुद्दे गंभीर हैं और उन्होंने दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी।
भाषा संतोष नरेश
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