महाराष्ट्र विशेष सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम के खिलाफ याचिकाएं निराधार : सरकार ने अदालत में कहा

महाराष्ट्र विशेष सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम के खिलाफ याचिकाएं निराधार : सरकार ने अदालत में कहा

महाराष्ट्र विशेष सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम के खिलाफ याचिकाएं निराधार : सरकार ने अदालत में कहा
Modified Date: August 10, 2026 / 05:24 pm IST
Published Date: August 10, 2026 5:24 pm IST

मुंबई, 10 अगस्त (भाषा) महाराष्ट्र सरकार ने सोमवार को बंबई उच्च न्यायालय से कांग्रेस, भाकपा और एआईटीयूसी की उन “बेबुनियाद” याचिकाओं को खारिज करने का अनुरोध किया, जिनमें वामपंथी उग्रवाद से निपटने के लिए बनाए गए ‘विशेष सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम’ की संवैधानिक वैधता को इसके संभावित दुरुपयोग के आधार पर चुनौती दी गई थी।

याचिकाओं में दावा किया गया था कि यह कानून “संविधान द्वारा संरक्षित शांतिपूर्ण और वैध असहमति को दबाएगा”।

जब कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखड की पीठ के सामने यह मामला सुनवाई के लिए आया, तो न्यायमूर्ति अंखड ने बिना कोई कारण बताए याचिकाओं की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया।

राज्य के महाधिवक्ता मिलिंद साठे ने याचिकाओं को खारिज करने की मांग करते हुए कहा कि वे बेबुनियाद हैं।

एआईटीयूसी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील नवरोज सीरवाई ने दलील दी कि महाराष्ट्र विशेष सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (एमएसपीएसए) असंवैधानिक और बेबुनियाद है, न कि याचिकाएं।

न्यायमूर्ति अंखड के खुद को मामले से अलग करने के बाद, अब इन याचिकाओं पर उच्च न्यायालय की दूसरी खंडपीठ सुनवाई करेगी।

पिछले साल जुलाई में राज्य विधानसभा से पारित हुए और दिसंबर में राष्ट्रपति मुर्मू की मंजूरी पाने वाले एमएसपीएसए का मकसद वामपंथी चरमपंथी संगठनों या ऐसी ही संस्थाओं की कुछ गैर-कानूनी गतिविधियों को प्रभावी ढंग से रोकना है।

कानून में चार ऐसे अपराध बताए गए हैं जिनके लिए किसी व्यक्ति को सजा दी जा सकती है: किसी गैर-कानूनी संगठन की सदस्यता लेना; या किसी ऐसे संगठन के लिए गैर-सदस्य द्वारा रकम इकट्ठा करना, उसके कामकाज में मदद करना या कोई गैर-कानूनी काम करना।

यह कानून राज्य सरकार को अधिकार देता है कि वह किसी भी संदिग्ध संगठन को “गैर-कानूनी संगठन” घोषित कर सकती है।

भाषा प्रशांत नरेश

नरेश


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