महाराष्ट्र में 23 हजार से अधिक आर्द्रभूमियों का भौतिक सत्यापन पूरा

महाराष्ट्र में 23 हजार से अधिक आर्द्रभूमियों का भौतिक सत्यापन पूरा

महाराष्ट्र में 23 हजार से अधिक आर्द्रभूमियों का भौतिक सत्यापन पूरा
Modified Date: May 20, 2026 / 12:07 pm IST
Published Date: May 20, 2026 12:07 pm IST

ठाणे, 20 मई (भाषा) राष्ट्रीय सतत तटीय प्रबंधन केंद्र (एनसीएससीएम) ने महाराष्ट्र की 23,415 आर्द्रभूमियों में से 11 को छोड़कर बाकी सभी का ‘ग्राउंड-ट्रुथिंग’ यानी भौतिक सत्यापन पूरा कर लिया है। इससे इन्हें ‘आर्द्रभूमि (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियमावली’ के तहत कानूनी संरक्षण प्रदान करने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

‘ग्राउंड-ट्रुथिंग’ के तहत उपग्रह चित्रों के आधार पर आर्द्रभूमियों के अस्तित्व, सीमाओं और वर्तमान भूमि उपयोग का सर्वेक्षण कर पुष्टि की जाती है। पर्यावरण कानूनों के तहत किसी आर्द्रभूमि को आधिकारिक रूप से अधिसूचित किए जाने से पहले इस तरह के भौतिक सत्यापन को एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया माना जाता है।

एनसीएससीएम द्वारा संचालित महाराष्ट्र आर्द्रभूमि डैशबोर्ड पर अपलोड नवीनतम जानकारी के अनुसार, शेष 11 आर्द्रभूमियां पुणे जिले में स्थित हैं और उनका भौतिक सत्यापन अभी जारी है।

अब तक जिन आर्द्रभूमियों का सर्वेक्षण किया गया है, उनमें ठाणे जिले की 247, रायगढ़ जिले की 1,093, मुंबई शहर की 37 और मुंबई उपनगर जिले की 210 आर्द्रभूमियां शामिल हैं।

राज्य में सर्वाधिक 1,596 आर्द्रभूमि अहमदनगर जिले में हैं। इसके बाद नासिक में 1,236 और चंद्रपुर में 1,231 आर्द्रभूमियां हैं।

‘नेटकनेक्ट फाउंडेशन’ के निदेशक बी. एन. कुमार ने कहा, “राष्ट्रीय आर्द्रभूमि एटलस जारी होने के 16 वर्ष बाद भी यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी, जबकि इसमें इतना समय नहीं लगना चाहिए था।”

उन्होंने कहा, “इस विलंब के कारण महाराष्ट्र के आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी तंत्र को काफी नुकसान हुआ है, विशेष रूप से उरण और मुंबई महानगर क्षेत्र जैसे जैव विविधता संपन्न इलाकों में, जहां मलबा डालने, अतिक्रमण और अवैज्ञानिक भूमि पुनरुद्धार के कारण आर्द्रभूमि लगातार प्रभावित होती रही हैं। अब जबकि ‘ग्राउंड-ट्रुथिंग’ लगभग पूरी हो चुकी है, तो सरकार को तुरंत इन आर्द्रभूमियों को अधिसूचित कर उन्हें कानूनी संरक्षण देना चाहिए।”

भाषा मनीषा वैभव

वैभव


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