ठाणे, चार जुलाई (भाषा) महाराष्ट्र के ठाणे जिले की एक अदालत ने विवाह का झांसा देकर एक महिला से बार-बार दुष्कर्म करने के आरोपी भोपाल निवासी 30 वर्षीय को बरी कर दिया। अदालत ने अदालत ने सबूतों के अभाव का हवाला देते हुए यह फैसला सुनाया, क्योंकि मुकदमे के दौरान पीड़िता का कोई पता नहीं चल सका।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश-4 प्रेमल एस. विठलानी ने बृहस्पतिवार को पारित आदेश में अमनदीप सिंह उर्फ गन्नू पिंटू लाम्बा को दुष्कर्म और धोखाधड़ी समेत सभी आरोपों से बरी कर दिया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 32 वर्षीय पीड़िता ने मार्च 2020 में एक वैवाहिक वेबसाइट पर प्रोफाइल बनाई थी, जहां उसका संपर्क लाम्बा से हुआ था।
अभियोजन पक्ष ने बताया कि धीरे-धीरे उसने महिला का विश्वास जीतकर और उससे विवाह करने का वादा करके उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए, हालांकि बाद में वह भोपाल लौट गया और महिला से संबंध तोड़कर विवाह करने से इनकार कर दिया। इसके बाद महिला की ओर से मिली शिकायत के आधार पर ठाणे के नवघर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई।
मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने केवल दो गवाहों की गवाही ली। कई बार समन जारी किए जाने के बावजूद शिकायतकर्ता अदालत के समक्ष बयान देने के लिए पेश नहीं हुई, जिसके कारण अभियोजन पक्ष को साक्ष्य दर्ज कराने की कार्रवाई बंद करनी पड़ी।
न्यायाधीश ने कहा कि आरोपी के पौरुष क्षमता प्रमाणपत्र समेत चिकित्सीय प्रमाणपत्रों को मुकदमे के दौरान साक्ष्य के रूप में स्वीकार किया गया।
न्यायाधीश ने कहा कि पीड़िता की मुख्य गवाही के अभाव में ऐसा चिकित्सीय साक्ष्य कानूनी रूप से दोष सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
आरोपों की पुष्टि के लिए मूलभूत गवाही के पूरी तरह अभाव को रेखांकित करते हुए अदालत ने कहा, ‘चूंकि शिकायतकर्ता का पता नहीं चल पाया है, इसलिए यह साबित करने के लिए कोई साक्ष्य नहीं है कि आरोपी ने शिकायतकर्ता के साथ धोखाधड़ी करके और विवाह का झूठा वादा करके बार-बार दुष्कर्म किया।’
इसके साथ ही अदालत ने आरोपी को बरी करने का आदेश दिया।
भाषा जोहेब दिलीप
दिलीप