ठाणे, तीन जुलाई (भाषा) महाराष्ट्र में ठाणे के मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) ने 2020 के एक सड़क हादसे में जान गंवाने वाले 45-वर्षीय स्कूल चपरासी के परिवार को 33 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।
सुनील दत्तात्रेय जाधव 26 अक्टूबर को खंडाला में पुराने पुणे-मुंबई राजमार्ग पर एक मोटरसाइकिल पर पीछे सवार थे। तभी तेज गति के कारण चालक ने बाइक पर से नियंत्रण खो दिया और यह फिसल गई। इस हादसे में जाधव को सिर में गंभीर चोटें आईं और 29 अक्टूबर को उनकी मौत हो गई।
एमएसीटी के अध्यक्ष आर. डी. सावंत ने बृहस्पतिवार को दिए अपने आदेश में बीमा कंपनी के उस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि जाधव खुद बाइक चला रहे थे और बाद में चालक को झूठे तरीके से मामले में शामिल किया गया है, ताकि मुआवजा लिया जा सके।
बीमा कंपनी ने यह भी कहा था कि प्राथमिकी दर्ज करने में 23 दिन की देरी हुई। कंपनी ने यह भी बताया कि कथित चालक वैभव देवकर को कोई चोट नहीं आई।
एमएसीटी ने अपने आदेश में कहा, ‘‘ऐसे कई मामले होते हैं जिनमें पीछे बैठा व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो जाता है और चालक को खरोंच तक नहीं आती। इसका यह मतलब नहीं है कि वैभव देवकर उस दुर्घटना में बाइक नहीं चला रहा था।’’
अधिकरण ने वाहन के मालिक और बीमा कंपनी को आदेश दिया कि वे मिलकर मुआवजे की राशि मृतक जाधव की पत्नी, दो नाबालिग बच्चों और बुजुर्ग मां को दें। साथ ही, उन्हें याचिका दाखिल करने की तारीख से सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
इस मुआवजे में यह ध्यान रखा गया है कि परिवार को जाधव के मूल वेतन के 50 प्रतिशत के बराबर पेंशन मिल रही है, इसलिए उसी के अनुसार कुछ कटौती की गई है।
मृत्यु के समय जाधव नेरुल स्थित नूतन मराठी विद्यालय में चपरासी के पद पर कार्यरत थे और उनका मासिक वेतन 40,362 रुपये था।
भाषा सुरेश पवनेश
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