मुंबई, 18 जुलाई (भाषा) शिवसेना (उबाठा) नेता अंबादास दानवे ने शनिवार को कहा कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा पार्टी के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे नीत शिवसेना गुट में विलय को मंजूरी देने का फैसला गैर-कानूनी है और पार्टी इसे अदालत में चुनौती दी जाएगी।
दानवे ने कहा कि संविधान की दसवीं अनुसूची के अनुसार, एक पार्टी का दूसरी पार्टी में विलय हो सकता है, लेकिन विधायकों या सांसदों का कोई समूह अपने स्तर पर ऐसा नहीं कर सकता।
उन्होंने कहा कि शिवसेना (उबाठा) के बागी सांसद एक अलग गुट बना सकते थे।
दानवे ने कहा, ‘यह मंजूरी गैर-कानूनी है। हम इस फैसले को चुनौती देंगे।’
पूर्व सांसद और शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के सदस्य संजय निरुपम ने कहा कि विलय से दल-बदल विरोधी कानून का उल्लंघन नहीं हुआ है।
उन्होंने कहा, ‘सभी छह सांसदों ने दल-बदल विरोधी कानून के तहत पूरी तरह से संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए (उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट से) अलग होने का फैसला किया। इसी के अनुसार, लोकसभा अध्यक्ष ने इस विलय को मंजूरी दी है। हम इस फैसले का स्वागत करते हैं।’
भाषा प्रचेता सिम्मी
सिम्मी