मुंबई, 21 जुलाई (भाषा) राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) में कथित अनियमितता को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (कॉजपा) के समर्थन और दिल्ली में उसके आंदोलन पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में विपक्ष तथा अन्य संगठनों ने मंगलवार को लगातार दूसरे दिन मुंबई में प्रदर्शन किया।
संसद के मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को नीट मामले में मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉजपा द्वारा संसद मार्च का आह्वान किया गया था, जिसमें हजारों लोगों ने भाग लिया।
दिल्ली पुलिस द्वारा रोके जाने पर वहां हिंसक झड़प और पथराव हुआ, जिसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े।
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने मध्य मुंबई के दादर स्थित शिवाजी पार्क में विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें पार्टी अध्यक्ष राज ठाकरे की पत्नी शर्मिला ठाकरे ने भी हिस्सा लिया। दूसरी ओर, शिवसेना (उबाठा) ने मरोल/डोंगरी इलाके में अलग से प्रदर्शन किया।
इधर, मुंबई के चेंबूर स्थित सिद्धार्थ कॉलोनी के निवासियों ने परीक्षा में हुई गड़बड़ियों के खिलाफ दिल्ली में कॉजपा के आंदोलन के समर्थन में एक विरोध मार्च निकाला और व्यस्त राजमार्ग को बाधित करने की कोशिश की, जिससे इलाके में तनाव व्याप्त हो गया।
एक अधिकारी ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली में कॉजपा समर्थकों पर हुई पुलिस कार्रवाई के खिलाफ ईस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे को जाम करने का प्रयास किया। हालांकि, पुलिसकर्मियों ने उन्हें राजमार्ग जाम करने से पहले ही रोक दिया, जिससे दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई। प्रदर्शनकारी नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन जारी रखने की अनुमति देने की मांग कर रहे थे, जिसके चलते कुछ समय के लिए स्थिति तनावपूर्ण बनी रही।
अधिकारी के अनुसार, पुलिस ने इस मुख्य मार्ग पर वाहनों की आवाजाही में कोई बाधा नहीं आने दी। इससे पहले, सोमवार को भी शहर के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए थे।
मुंबई के कई हिस्सों में सोमवार को भी विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए थे। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (कॉजपा) द्वारा आयोजित ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि इस बर्बर कार्रवाई से खुद सरकार ही अपना मानसिक संतुलन खो बैठी है।
सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में राज ठाकरे ने कहा कि सत्ता में बैठे लोग दुनिया के सामने यह दिखाने के लिए आतुर दिखते हैं कि वे कैसे न्यायसंगत विरोध प्रदर्शनों को कुचलते हैं और अन्य राष्ट्राध्यक्षों को यह सब दिखाने में उन्हें आनंद मिलता है।
मनसे प्रमुख ने सवाल किया कि आखिर धर्मेंद्र प्रधान हैं कौन? जिनके इस्तीफे को सरकार अपनी व्यक्तिगत विफलता के रूप में देख रही है?
उन्होंने कहा, ‘कल प्रदर्शनकारियों पर हुए बर्बर लाठीचार्ज को देखने के बाद ऐसा लगता है कि सरकार खुद अपना मानसिक संतुलन खो बैठी है और उसे अस्पताल में भर्ती कराए जाने की जरूरत है।’
मनसे नेता ने कहा कि जब मणिपुर जातीय संघर्ष की आग में जल रहा था, तब भी भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने तत्कालीन मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह का इसी तरह बचाव किया था।
उन्होंने दावा किया कि इतिहास हमेशा याद रखेगा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल के दौरान छात्रों के एक शांतिपूर्ण आंदोलन को बेरहमी से कुचला गया था।
इस बीच, एक अन्य घटनाक्रम में शिवसेना (उबाठा) नेता आदित्य ठाकरे ने कहा कि कॉजपा के संस्थापक अभिजीत दीपके और शिक्षाविद सोनम वांगचुक के समर्थन में प्रदर्शन करने वाले छात्रों और कार्यकर्ताओं के खिलाफ मुंबई में प्राथमिकी दर्ज की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि पुलिस अब तक 100 लोगों को हिरासत में ले चुकी है।
पूर्व राज्य मंत्री ने कहा कि उनकी पार्टी ने उन छात्रों और कार्यकर्ताओं को कानूनी सहायता प्रदान करने की पहल की है, जिनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई हैं या नोटिस जारी किए गए हैं। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र में ऐसे प्रभावित छात्र और कार्यकर्ता पार्टी से संपर्क कर सकते हैं।
भाषा सुमित दिलीप
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