दिल्ली की सड़कों पर ‘कॉकरोचों’ का प्रदर्शन क्रांति की शुरुआत : शिवसेना

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दिल्ली की सड़कों पर 'कॉकरोचों' का प्रदर्शन क्रांति की शुरुआत : शिवसेना

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  • Publish Date - July 21, 2026 / 03:29 PM IST,
    Updated On - July 21, 2026 / 03:29 PM IST

मुंबई, 21 जुलाई (भाषा) केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों पर केंद्र सरकार की कार्रवाई को लेकर निशाना साधते हुए शिवसेना (उबाठा) ने मंगलवार को कहा कि यह मौजूदा प्रदर्शन एक क्रांति की शुरुआत है, जिसमें ‘लाखों कॉकरोचों’ ने एक निर्णायक कदम उठाया है।

पार्टी मुखपत्र ‘सामना’ में प्रकाशित एक संपादकीय में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर ‘भ्रष्ट और अक्षम’ मंत्रियों को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए दावा किया कि वह ‘देशद्रोह कर रहे हैं’ और देश को बर्बाद कर रहे हैं।

संपादकीय में कहा गया, ‘यही कारण है कि लाखों ‘कॉकरोच’ (प्रदर्शनकारी) संसद की ओर बढ़ रहे हैं और मोदी के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। यह एक क्रांति की शुरुआत है। लाखों कॉकरोच क्रांति की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।’

विभिन्न परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ सोमवार को कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के ‘संसद चलो’ मार्च में हजारों प्रदर्शनकारी शामिल हुए और संसद की ओर बढ़ने के दौरान उनकी पुलिस के साथ तीखी झड़प हुई जिसके जवाब में पुलिस ने लाठीचार्ज किया तथा आंसू गैस के गोले छोड़े।

संपादकीय में दावा किया गया कि प्रधानमंत्री जिम्मेदारी स्वीकार करने के इच्छुक नहीं हैं। इसमें यह सवाल भी उठाया गया कि प्रधान को सरकार का समर्थन क्यों मिलता जा रहा है।

संपादकीय में कहा गया, ‘आखिर धर्मेंद्र प्रधान कौन हैं कि उन्हें इतना बचाया जा रहा है? वह जो कोई भी हों, उन्होंने भारतीय युवाओं का जीवन बर्बाद कर दिया है। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने की जिम्मेदारी प्रधान के कंधों पर है और इसके लिए उन्हें सजा मिलनी चाहिए।’

संपादकीय के अनुसार, देश भर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ जन आक्रोश फैल गया है और कई राज्यों के युवा सड़कों पर उतर आए हैं। इसमें कहा गया है कि प्रदर्शनों के दौरान ‘तानाशाही नहीं चलेगी’ और ‘मोदी सत्ता छोड़ो’ जैसे नारे लगाए जा रहे हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनिश्चितकालीन अनशन का जिक्र करते हुए संपादकीय में आरोप लगाया गया कि सरकार को शुरुआत में लगा था कि उनके इस विरोध प्रदर्शन को पांच मिनट में कुचल दिया जाएगा। हालांकि, जब उनका अनशन 20 दिनों तक जारी रहा और वह आत्म-बलिदान के अपने फैसले पर अडिग रहे तो सरकार घबरा गई और उन्हें अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया।

संपादकीय के अनुसार, वांगचुक को हिरासत में लिए जाने से जनता का असंतोष और बढ़ गया जिसके परिणामस्वरूप नयी दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘लाखों ‘कॉकरोच’ (प्रदर्शनकारी)’ एकत्र हो गए।

भाषा प्रचेता नरेश

नरेश