सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने की कार्रवाई लोकतांत्रिक असहमति का दमन : कांग्रेस

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सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने की कार्रवाई लोकतांत्रिक असहमति का दमन : कांग्रेस

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  • Publish Date - July 18, 2026 / 05:45 PM IST,
    Updated On - July 18, 2026 / 05:45 PM IST

मुंबई, 18 जुलाई (भाषा) महाराष्ट्र में विपक्षी दल कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) ने जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाए जाने की शनिवार को आलोचना करते हुए कहा कि यह कार्रवाई लोकतांत्रिक असहमति को दबाने तथा सरकार की ‘तानाशाही मानसिकता’ को दर्शाती है।

वांगचुक दिल्ली में 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर थे। वह राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट)-यूजी में अनियमितताओं और इस विवाद के कारण छात्रों के कथित तौर पर आत्महत्या करने की घटना के विरोध में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (कॉजपा) के नेतृत्व वाले प्रदर्शन के समर्थन में अनशन कर रहे थे। शनिवार सुबह आंदोलन के 21वें दिन स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया। पुलिस ने इसके लिए चिकित्सकीय सलाह और दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देशों का हवाला दिया था।

महाराष्ट्र में कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने आरोप लगाया कि वांगचुक के खिलाफ केंद्र सरकार की कार्रवाई ‘तानाशाही मानसिकता’ को दर्शाती है और यह लोकतांत्रिक असहमति को दबाने के समान है।

उन्होंने एक बयान में कहा कि लंबे समय से भूख हड़ताल कर रहे वांगचुक के खिलाफ पुलिस बल का इस्तेमाल ‘दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय’ है।

वडेट्टीवार ने कहा कि गांधीवादी तरीके से प्रदर्शन कर रहे एक व्यक्ति से संवाद शुरू करने के बजाय केंद्र सरकार ने बल प्रयोग का रास्ता अपनाया।

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘केंद्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार अपने खिलाफ उठने वाली हर आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है। लोकतंत्र चर्चा और असहमति से मजबूत होता है, डराने-धमकाने से नहीं।’’

उन्होंने आरोप लगाया कि वांगचुक को बातचीत करने के बजाय हिरासत में लेना केंद्र सरकार के ‘तानाशाही रवैये’ को उजागर करता है। उन्होंने सरकार से आंदोलन को दबाने के बजाय कार्यकर्ता के साथ बातचीत करने की अपील की।

राकांपा (शरदचंद्र पवार) के नेता जयंत पाटिल ने भी दिल्ली में प्रदर्शन स्थल से वांगचुक को ले जाने की कार्रवाई की आलोचना की।

पाटिल ने कहा कि उनकी मांगों पर उचित विचार किए बिना उन्हें अस्पताल ले जाने का पुलिस का कदम ‘बेहद चिंताजनक’ है।

राकांपा (शप) के नेता ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि यह कार्रवाई जारी आंदोलन को दबाने का प्रयास प्रतीत होती है।

उन्होंने कहा, ‘‘लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक को विरोध करने और अपनी राय रखने का मौलिक अधिकार है।’’

पाटिल ने केंद्र सरकार से प्रदर्शनकारियों की मांगों पर ‘संवेदनशील बातचीत’ करने और समाधान की दिशा में काम करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसी कार्रवाई करने के बजाय संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘लोकतंत्र में जनता की आवाज सुनी जानी चाहिए।’’

भाषा रवि कांत दिलीप

दिलीप