मुंबई, 11 जून (भाषा) राकांपा (शरदचंद्र पवार) की नेता सुप्रिया सुले ने बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से देश की आर्थिक स्थिति पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश की जनता ईंधन की बढ़ती कीमतों और एलपीजी सब्सिडी में कटौती जैसी समस्याओं का सामना कर रही है।
सुले ने कहा कि देश के सामने मौजूद चुनौतियों से निपटने के लिए राजनीतिक मतभेदों को दरकिनार कर अर्थशास्त्रियों से सलाह ली जानी चाहिए।
उन्होंने भाजपा पर ‘‘दलों को तोड़ने की आदत’’ होने का आरोप लगाते हुए इस चलन को लोकतंत्र के लिए नुकसानदेह बताया।
राकांपा (एसपी) नेता ने यहां पत्रकारों से बातचीत में कहा, ‘‘देश सबसे पहले आता है, उसके बाद राज्य, पार्टी और परिवार। अगर देश सुरक्षित रहेगा, तो बाकी सब कुछ भी सुरक्षित रहेगा।’’
बारामती की सांसद ने कहा कि विपक्ष ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान सरकार के साथ मजबूती से खड़ा था और आर्थिक मुद्दों से निपटने में भी वैसा ही समर्थन देने को तैयार है। उन्होंने कहा कि देश आर्थिक मुश्किलों का सामना कर रहा है।
मौजूदा हालात की तुलना संप्रग सरकार के दौर से करते हुए, राकांपा (एसपी) की कार्यकारी अध्यक्ष ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में कच्चे तेल की कीमतें 108-110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, जबकि उस समय डॉलर के मुकाबले रुपया 60-65 के भाव पर था और पेट्रोल-डीजल की कीमतें कम थीं।
उन्होंने कहा, ‘‘आज कच्चे तेल की कीमतें कम हैं, लेकिन पेट्रोल और डीजल की कीमतें ज्यादा हैं। जब डॉ. मनमोहन सिंह ने ईंधन की कीमतें दो रुपये बढ़ाई थीं, तो भाजपा ने जबरदस्त हंगामा किया था। अब कीमतें क्यों बढ़ाई जा रही हैं?’’
सुले ने देश के विकास में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के योगदान का जिक्र किया और कहा कि सत्ता में 12 साल रहने के बाद भी भाजपा कांग्रेस को ही निशाना बनाती रही है।
जब उनसे प्रधानमंत्री मोदी के कांग्रेस पर हमले के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, ‘‘अगर मैंने 12 साल काम किया होता, तो मैं अपने काम के बारे में बात करती। 12 साल बाद भी भाजपा को कांग्रेस के बारे में ही बात करनी पड़ती है। यही कांग्रेस की सफलता है।’’
शिवसेना (उबाठा) सांसद संजय राउत के इस सुझाव के बारे में पूछे जाने पर कि तृणमूल कांग्रेस और राकांपा (एसपी) को कांग्रेस में विलय कर लेना चाहिए, सुले ने कहा कि लोकतंत्र में हर किसी को अपनी राय रखने का अधिकार है।
सुले ने कहा, ‘‘मेरे लिए संजय राउत बड़े भाई की तरह हैं। उन्होंने एक अच्छा सुझाव दिया है, लेकिन क्या होगा और कैसे होगा, यह तो समय ही बताएगा।’’
विपक्षी दलों को तोड़ने की कोशिशें किए जाने का आरोप लगाते हुए सुले ने कहा कि एकनाथ शिंदे नीत शिवसेना और सुनेत्रा पवार की अगुवाई वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा), दोनों ही ऐसी स्थितियों का सामना कर चुकी हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘पहले शिवसेना टूटी और फिर राकांपा। हम इस दौर से गुजर चुके हैं। इसलिए, हम तृणमूल कांग्रेस के साथ मजबूती से खड़े हैं। हम पूरी ताकत से लड़ाई लड़ेंगे और अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। सच को परेशान किया जा सकता है, लेकिन उसे कभी हराया नहीं जा सकता।’’
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शफीक वैभव
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