ठाणे आईवीएफ रैकेट: फर्जी पहचान दस्तावेज बनाने के आरोप में जलगांव का इलेक्ट्रीशियन गिरफ्तार

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ठाणे आईवीएफ रैकेट: फर्जी पहचान दस्तावेज बनाने के आरोप में जलगांव का इलेक्ट्रीशियन गिरफ्तार

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  • Publish Date - March 6, 2026 / 02:39 PM IST,
    Updated On - March 6, 2026 / 02:39 PM IST

ठाणे, छह मार्च (भाषा) पुलिस ने अवैध रूप से मानव अंडाणु निकालने और सरोगेसी रैकेट के सिलसिले में जलगांव से एक इलेक्ट्रीशियन को गिरफ्तार किया है। यह इस मामले में सातवीं गिरफ्तारी है।

पुलिस के एक अधिकारी ने शुक्रवार को बताया कि आरोपी की पहचान सतीश चौधरी के रूप में हुई है, जिसने कथित तौर पर आर्थिक रूप से कमजोर उन महिलाओं के लिए आधार कार्ड और अन्य पहचान दस्तावेज बनाए थे जिनका शोषण किया गया।

उन्होंने बताया कि इन फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल पीड़ितों की पहचान छिपाने और बिना किसी संदेह के अवैध प्रक्रियाओं को सुविधाजनक बनाने के लिए किया गया था।

इस सप्ताह की शुरुआत में पुलिस ने नासिक के एक दंत चिकित्सक को गिरफ्तार किया था, जिस पर आरोप है कि उसने इस मामले में जारी जांच के दौरान अपनी पत्नी के नाम पर पंजीकृत एक आईवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) केंद्र में अवैध ‘सरोगेसी’ अनुबंध कराने में मदद की थी।

अधिकारी ने कहा, “यह रैकेट एक बड़ा और सुव्यवस्थित नेटवर्क प्रतीत होता है। हम अन्य चिकित्सा पेशेवरों तथा बिचौलियों की संलिप्तता की जांच कर रहे हैं, इसलिए और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।”

उन्होंने बताया कि इस मामले में अब तक सात लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

इस रैकेट का खुलासा ठाणे जिले के बदलापुर में तब हुआ जब एक महिला ने शिकायत की कि उसे अंडाणु दान करने के लिए भुगतान नहीं किया गया है।

इसके बाद मामले के कथित सरगना सुलक्षणा गाडेकर (44) के आवास पर छापा मारा गया, जहां से ‘हार्मोनल इंजेक्शन’ बरामद किए गए।

जांचकर्ताओं को संदेह है कि इस अपराध में एक अंतरराज्यीय नेटवर्क शामिल है।

पुलिस के अनुसार, मोबाइल फोन से जब्त किए गए आंकड़ों से पता चलता है कि अंडाणु देने वाली महिलाओं को 25,000 रुपये से 30,000 रुपये के प्रस्ताव देकर लुभाया गया था।

पीड़ित महिलाओं को गाडेकर के आवास पर इंजेक्शन दिए जाने के बाद उन्हें अंडाणु निकालने के लिए बेंगलुरु, तेलंगाना, नागपुर, पुणे और नासिक ले जाया गया था।

अंडाणु दान वह प्रजनन प्रक्रिया है जिसमें एक महिला अपना अंडाणु किसी दूसरी महिला को गर्भधारण में मदद के लिए देती है। यह आमतौर पर ‘आईवीएफ’ के माध्यम से होता है।

‘आईवीएफ’ एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें अंडाणु और शुक्राणु को शरीर के बाहर निकालकर उन्हें मिलाया जाता है जिससे भ्रूण बनता है और फिर उसे महिला के गर्भाशय में स्थानांतरित किया जाता है ताकि गर्भधारण हो सके।

इस बीच, नगर निकाय अधिकारियों ने उल्हासनगर के भगवान अस्पताल में एक सोनोग्राफी केंद्र को नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में सील कर दिया।

भाषा

प्रचेता नेत्रपाल

नेत्रपाल