पेरिस में भारतीयों के ‘जय महाराष्ट्र’ के नारे लगाने की घटना ने सार्वजनिक आचरण पर बहस छेड़ी
पेरिस में भारतीयों के ‘जय महाराष्ट्र’ के नारे लगाने की घटना ने सार्वजनिक आचरण पर बहस छेड़ी
मुंबई, 19 जनवरी (भाषा) पेरिस में एक ‘स्ट्रीट परफॉर्मर’ के पास भारतीय पुरुषों के एक समूह द्वारा ‘जय महाराष्ट्र’, ‘जय शिवसेना’ और ‘छत्रपति शिवाजी महाराज की जय’ जैसे नारे लगाये जाने के एक वायरल वीडियो ने सार्वजनिक आचरण को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है।
फ्रांस की राजधानी के भीड़भाड़ वाले मोंटमार्ट्रे इलाके में बनाये गए इस वीडियो में एक व्यक्ति को मूक कलाकार (शारीरिक हावभाव और चेहरे के भावों के माध्यम से कहानी कहने वाला व्यक्ति) के कंधे पर हाथ रखकर नारे लगाते देखा जा सकता है, जबकि अन्य लोग भी उसके साथ शामिल हो जाते हैं।
कलाकार स्पष्ट रूप से असहज दिखाई देता है और उन्हें रुकने के लिए इशारे करता है, लेकिन उसकी गुहार अनसुनी कर दी जाती है और भारतीय नारे लगाना जारी रखते हैं।
इस घटना ने नैतिकता, विदेश में सार्वजनिक व्यवहार और सार्वजनिक स्थानों पर राष्ट्रवाद के इस तरह के प्रदर्शन जैसे मुद्दों पर बहस छेड़ दी है।
वीडियो में एक व्यक्ति को मूक कलाकार के साथ तस्वीर खिंचवाते हुए और जोर-जोर से नारे लगाते देखा जा सकता है। हालांकि, कलाकार उसे चुप रहने का इशारा करता है, लेकिन वह व्यक्ति जोर से नारे लगाता रहता है, यहां तक कि समूह के अन्य लोग भी नारे लगाना शुरू कर देते हैं।
उस व्यक्ति को महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के समर्थन में नारे लगाते हुए भी सुना गया, जिससे कई लोगों ने यह कयास लगाया कि वह शिंदे के गृह क्षेत्र ठाणे से होगा।
लेखक सूरज कुमार बौद्ध ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘पेरिस में भारतीय पर्यटकों की मूर्खता। उन्होंने एक ‘स्ट्रीट परफॉर्मर’ को भी परेशान किया, जो शांतिपूर्वक अपनी कला का प्रदर्शन कर रहा था। कलाकार ने उन्हें ‘‘जय महाराष्ट्र, जय शिवाजी’’ जैसे नारे लगाने और उसके साथ रील बनाने से रोका, और यह सब उसकी निजता का जरा भी सम्मान किए बिना किया गया। शर्मनाक!’’
एक सोशल मीडिया उपयोगकर्ता ने कहा, ‘‘इन लोगों को देश से निकाल देना चाहिए और जीवन भर के लिए देश में प्रवेश करने पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए।’’
एक अन्य उपयोगकर्ता ने कहा कि समूह ने कलाकार के संकेतों को नजरअंदाज कर दिया और कहा, ‘‘वह व्यक्ति ठीक उसके उलट कर रहा था, जो स्ट्रीट परफॉर्मर कह रहा था।’’
भाषा सुभाष दिलीप
दिलीप

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