मुंबई के महापौर पद के लिए आरक्षण का फैसला 22 जनवरी को लॉटरी के जरिए होगा

मुंबई के महापौर पद के लिए आरक्षण का फैसला 22 जनवरी को लॉटरी के जरिए होगा

मुंबई के महापौर पद के लिए आरक्षण का फैसला 22 जनवरी को लॉटरी के जरिए होगा
Modified Date: January 19, 2026 / 06:22 pm IST
Published Date: January 19, 2026 6:22 pm IST

मुंबई, 19 जनवरी (भाषा) महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई और 28 अन्य नगर निकायों के महापौरों के चुनाव की प्रक्रिया शुरू कर दी है, और महापौर पद किस श्रेणी में जाएगा इसका फैसला 22 जनवरी को लॉटरी के जरिए होगा।

शहरी विकास विभाग ने एक आदेश जारी कर कहा है कि यह काम लॉटरी के जरिये राज्य सचिवालय (मंत्रालय) में होगा।

महाराष्ट्र में महापौरों का चुनाव पार्षदों द्वारा किया जाता है और यह पद रोटेशन के आधार पर आरक्षण के अधीन होता है। लॉटरी के माध्यम से यह निर्धारित किया जाता है कि महापौर का पद किस श्रेणी के लिए आरक्षित होगा, जैसे सामान्य, महिला, अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और ओबीसी श्रेणी। श्रेणी की घोषणा होने के बाद, पात्र उम्मीदवार अपना नामांकन दाखिल करते हैं।

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इसके बाद, नगर निकायों के निर्वाचित पार्षदों की एक विशेष बैठक में चुनाव आयोजित किया जाता है। सदन की कुल सदस्य संख्या के आधे से अधिक मत हासिल करने वाला उम्मीदवार महापौर निर्वाचित होता है। किसी भी एकल पार्टी को स्पष्ट बहुमत न मिलने की स्थिति में गठबंधन निर्णायक भूमिका निभाते हैं।

मुंबई में, 15 जनवरी को हुए चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। भाजपा ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की कुल 227 सीटों में से 89 सीटों पर जीत हासिल की है और करीब 30 वर्षों के बाद ठाकरे परिवार से देश के सबसे अमीर नगर निकाय का नियंत्रण छीन लिया है। उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली भाजपा की सहयोगी शिवसेना ने 29 सीटें हासिल की हैं।

राज्य के 29 नगर निकायों में हाल में चुनाव हुए हैं।

भाषा

नोमान माधव

माधव


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