शिवसेना पार्षद की मारपीट के शिकार दो चिकित्सकों ने इस्तीफा दिया

शिवसेना पार्षद की मारपीट के शिकार दो चिकित्सकों ने इस्तीफा दिया

शिवसेना पार्षद की मारपीट के शिकार दो चिकित्सकों ने इस्तीफा दिया
Modified Date: July 9, 2026 / 08:13 pm IST
Published Date: July 9, 2026 8:13 pm IST

(फोटो के साथ)

ठाणे, नौ जुलाई (भाषा) महाराष्ट्र के ठाणे जिले में नगर निकाय की ओर से संचालित अस्पताल के उन दो चिकित्सकों ने इस्तीफा दे दिया है, जिनके साथ स्थानीय शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे और उनके साथियों ने कथित तौर पर मारपीट की थी। एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

इस्तीफा देने वाले चिकित्सकों में एक महिला डॉक्टर शामिल हैं। परिजन और सहकर्मियों ने कहा कि मारपीट की घटना के बाद दोनों डॉक्टर गहरे सदमे में थे।

सोशल मीडिया पर घटना का एक कथित वीडियो प्रसारित हुआ है, जिसमें म्हात्रे एक डॉक्टर को थप्पड़ और घूंसे मारते तथा उनके सिर पर रजिस्टर पटकते हुए नजर आ रहे हैं। वीडियो में उन्हें एक महिला डॉक्टर के हाथ पर वार करते हुए भी देखा जा सकता है।

कल्याण-डोंबिवली महानगर पालिका (केडीएमसी) की ओर से संचालित शास्त्री नगर अस्पताल में सोमवार शाम हुई इस घटना को लेकर भारी आक्रोश फैल गया।

पीड़ित डॉक्टरों -चिकित्सा अधिकारी डॉ. वैभव सालुंखे और रेजिडेंट चिकित्सा अधिकारी डॉ. सृष्टि बाविस्कर- ने सोमवार शाम एक शिशु के रिश्तेदारों को उसे किसी दूसरे अस्पताल में ले जाने की सलाह दी थी, क्योंकि शास्त्री नगर अस्पताल की नवजात गहन देखभाल इकाई (एनआईसीयू) में जगह नहीं थी।

अधिकारियों के मुताबिक, इस सलाह से नाखुश रिश्तेदारों ने शिवसेना पार्षद से संपर्क किया, जो अपने साथियों के साथ वहां पहुंचे और डॉक्टरों के साथ मारपीट की।

अधिकारियों ने बताया कि मारपीट में डॉ. सालुंखे घायल हो गए। उन्होंने बताया कि आरोपी पार्षद को बुधवार रात गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि उनके तीन सहयोगियों को मंगलवार को हिरासत में लिया गया था।

केडीएमसी की चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. दीपा शुक्ला ने बताया कि एक आउटसोर्सिंग एजेंसी के जरिये अस्पताल में नियुक्त डॉ. सालुंखे और डॉ. बाविस्कर ने उस कंपनी को अपना इस्तीफा सौंप दिया है।

डॉ. शुक्ला ने कहा, ‘दोनों चिकित्सकों की नियुक्ति एक आउटसोर्सिंग एजेंसी के जरिये की गई थी। उन्होंने सीधे संबंधित आउटसोर्सिंग एजेंसी को ही अपना इस्तीफा सौंपा होगा। उनके इस्तीफे से जुड़े कागजात अभी तक हमारे विभाग तक नहीं पहुंचे हैं।’

मामले में पीड़ित चिकित्सकों की प्रतिक्रिया के लिए उनसे संपर्क नहीं हो सका।

सहकर्मियों के अनुसार, मारपीट के शिकार डॉक्टर गहरे सदमे में हैं।

एक सहकर्मी ने कहा, ‘हमारे माता-पिता ने अपनी मेहनत की कमाई और कोशिशें हमें पढ़ाने-लिखाने में लगाईं, ताकि हम आम और गरीब मरीजों की नियमित रूप से सेवा कर सकें। यह बात हैरान करने वाली और बिल्कुल बर्दाश्त न करने लायक है कि कोई बाहरी व्यक्ति अस्पताल में घुस आए और मरीजों का इलाज करते समय हम पर हमला करे।’

डॉ. बाविस्कर के परिजन ने कहा कि घटना के बाद अस्पताल में डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर उनकी चिंता बढ़ गई है।

भाषा पारुल सुरेश

सुरेश


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