‘गांव बिकाऊ है’: पानी के संकट से जूझ रहे महाराष्ट्र के गांव की गुहार

‘गांव बिकाऊ है’: पानी के संकट से जूझ रहे महाराष्ट्र के गांव की गुहार

‘गांव बिकाऊ है’: पानी के संकट से जूझ रहे महाराष्ट्र के गांव की गुहार
Modified Date: September 28, 2026 / 06:50 pm IST
Published Date: September 28, 2026 6:50 pm IST

सोलापुर, 28 सितंबर (भाषा) पानी की एक-एक बूंद को तरस रहे और अपने खेतों व कुओं को सूखता देख महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के एक गांव के लोगों ने एक अनोखा बैनर लगाया है, जिस पर लिखा है – ‘गांव बिकाऊ है’।

ग्रामीणों ने अपने इस गांव को खरीदने वाले से बदले में कीमत के तौर पर सिर्फ पानी मांगा है।

सोलापुर की माढ़ा तहसील के तुलशी गांव के लगभग 7,000 निवासियों द्वारा किया जा रहा यह अनोखा विरोध-प्रदर्शन दशकों से सरकारी योजनाओं और आश्वासनों के पूरा न होने का नतीजा है।

‘सीना-माढ़ा लिफ्ट सिंचाई योजना’ की खुदाई का काम अधूरा रहने के कारण यह गांव कई सालों से सूखा पड़ा है, जिससे यहां के लोग पूरी तरह से पानी के टैंकरों पर निर्भर होने के लिए मजबूर हैं।

तुलशी गांव के सरपंच शरद मोरे ने कहा, ‘गांव हर साल पानी के गंभीर संकट से जूझता है। हालांकि सीना-माढ़ा योजना की नहरें गांव के पास से ही गुजरती हैं, लेकिन हमें इसका कोई फायदा नहीं मिलता। ‘गांव बिकाऊ है, कीमत: पानी’ का बोर्ड लगाकर हम सरकार का ध्यान अपनी लाचारी की ओर खींचने की कोशिश कर रहे हैं।’

पानी की मांग को लेकर ग्रामीणों ने 14 सितंबर को भूख हड़ताल शुरू की थी और बाद में माढ़ा तहसील कार्यालय के बाहर ‘थाली-नाद’ (थाली/बरतन बजाकर) प्रदर्शन किया। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे।

सरपंच मोरे ने पहले बताया था कि सीना-माढ़ा योजना के सातवें और आठवें निकासी मार्ग के पास लगभग 800 मीटर की खुदाई का काम पिछले 26 वर्षों से अधूरा पड़ा है।

उन्होंने कहा कि अगर यह खुदाई पूरी हो जाए तो तुलशी गांव की पानी की समस्या का स्थायी समाधान हो सकता है।

ग्रामीणों के अनुसार, गांव पहले से ही पानी के टैंकरों पर निर्भर है और इस मानसून में कम बारिश होने के कारण यह किल्लत और बढ़ गई है।

उन्होंने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत काम तो कराए गए हैं, लेकिन यह योजना कारगर साबित नहीं हुई क्योंकि स्थानीय जल स्रोत पूरी तरह सूख चुके हैं।

पानी के इस संकट ने न केवल तुलशी गांव के निवासियों की आजीविका को बुरी तरह प्रभावित किया है, जो मुख्य रूप से खेती और पशुपालन से जुड़े हैं, बल्कि इसका असर उनके निजी जीवन पर भी पड़ा है। इसके चलते गांव के कई युवाओं की शादियां नहीं हो पा रही हैं।

मोरे ने दावा किया कि तुलशी गांव के लगभग 350 युवा अविवाहित हैं, क्योंकि पानी की भीषण किल्लत को देखते हुए कोई भी अपनी बेटी का रिश्ता यहां करने को तैयार नहीं होता।

भाषा सुमित नरेश

नरेश


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