लातूर में किसानों ने कद्दू, गाजर लेकर किया प्रदर्शन, सरकार के सूखा राहत उपायों को बताया नाकाफी
लातूर में किसानों ने कद्दू, गाजर लेकर किया प्रदर्शन, सरकार के सूखा राहत उपायों को बताया नाकाफी
लातूर (महाराष्ट्र), 28 सितंबर (भाषा) महाराष्ट्र सरकार द्वारा घोषित सूखा राहत उपायों को अपर्याप्त बताते हुए किसानों ने सोमवार को लातूर के जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर कद्दू और गाजर लेकर विरोध प्रदर्शन किया।
सूखाग्रस्त मराठवाड़ा क्षेत्र में स्थित इस जिले में लंबे समय से बारिश न होने के कारण हुए फसल नुकसान के मुआवजे के रूप में किसानों ने एक लाख रुपये प्रति हेक्टेयर की तत्काल प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता की मांग की।
राज्य सरकार ने 26 सितंबर को राज्य के 358 में से 265 तहसीलों में सूखा घोषित किया था और राहत उपायों की घोषणा की थी। इसमें फसलों के कर्ज चुकाने का कार्यक्रम नए सिरे से बनाना, जमीन के लगान में रियायत, खेती के कर्ज की वसूली टालना और सिंचाई पंपों के बिजली बिल में राहत देना शामिल है।
इसके साथ ही सरकार ने जिलाधिकारियों को फसलों के नुकसान का आकलन करने के भी निर्देश दिए हैं।
राज्य की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने कहा था कि किसानों को मिलने वाली वास्तविक वित्तीय सहायता का फैसला जमीनी स्तर पर आकलन के बाद किया जाएगा।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सरकारी आदेश में किसानों को तत्काल प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता प्रदान नहीं की गई है। उन्होंने मांग की कि बिना किसी देरी के फसल नुकसान के मुआवजे की घोषणा की जाए।
जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन के दौरान कई किसान हाथों में कद्दू और गाजर लिए हुए थे और उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से सरकारी आदेश (जीआर) की प्रति जलाई।
इस विरोध प्रदर्शन का आयोजन क्रांतिकारी शेतकरी संगठन ने किया था, जिसका नेतृत्व इसके प्रदेश अध्यक्ष राजीव कसबे कर रहे थे।
संगठन ने जिला प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें सूखा प्रभावित किसानों के लिए एक लाख रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजा, नियमित ऋण चुकाने वाले किसानों के लिए दो लाख रुपये का विशेष अनुदान और पात्र किसानों को तत्काल नया फसल ऋण उपलब्ध कराने सहित कई मांगे शामिल हैं।
भाषा सुमित माधव
माधव

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