पुणे, 22 अगस्त (भाषा) कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने शनिवार को कहा कि समाज में महिलाओं को आगे बढ़ने से रोकने के लिए हिंसा का इस्तेमाल किया जाता है और 80 प्रतिशत महिलाएं उत्पीड़न का सामना करती हैं।
महिलाओं को देश की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें अपने लिए आवाज उठानी चाहिए और खुद पर विश्वास रखना चाहिए।
पार्टी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने महिलाओं के खिलाफ हिंसा के ‘‘तीन रूप’’ -शारीरिक हिंसा, अवसरों से वंचित कर हिंसा और आर्थिक हिंसा गिनाए।
गांधी ने कहा कि हर साल 4.5 लाख कन्या भ्रूण हत्या के मामले सामने आते हैं, 80 प्रतिशत महिलाएं उत्पीड़न का सामना करती हैं, 29 प्रतिशत को शारीरिक हिंसा झेलनी पड़ती है और छह प्रतिशत महिलाएं दुष्कर्म का सामना करती हैं। उन्होंने दावा किया कि सामाजिक कलंक के डर से यौन हिंसा की 99 प्रतिशत घटनाओं की शिकायत दर्ज नहीं होती।
उन्होंने कहा कि सुरक्षा के नाम पर 50 प्रतिशत महिलाओं को शिक्षा या रोजगार के अवसरों से वंचित कर दिया जाता है। महिलाओं को सुरक्षित यात्रा के नाम पर हर साल अतिरिक्त 17,500 रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि महिलाओं को कई तरह की पाबंदियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने दावा किया कि 60 प्रतिशत महिलाएं अकेले घर से बाहर नहीं जा सकतीं।
उन्होंने कहा, ‘‘लड़के को किसी भी समय बाहर जाने और देर से घर आने की इजाजत होती है, लेकिन लड़कियों को रात आठ बजे तक घर लौटना पड़ता है। लड़के किसी भी परीक्षा में कई बार बैठ सकते हैं, लेकिन लड़कियों को केवल एक मौका मिलता है। उनसे कहा जाता है कि यह उनकी शादी का समय है और परीक्षा देने जाने की जरूरत नहीं है।’’
गांधी ने कहा कि 45 प्रतिशत महिलाओं को शादी या घरेलू जिम्मेदारियों के कारण पढ़ाई या काम छोड़ना पड़ता है, जबकि केवल आठ प्रतिशत महिलाओं के नाम जमीन है।
घरों में असमानता को रेखांकित करते हुए गांधी ने कहा कि 15 से 29 वर्ष की आयु की महिलाएं घर में 5.5 घंटे काम करती हैं, जबकि उसी घर में लड़के केवल 30 मिनट काम करते हैं।
उन्होंने यह भी दावा किया कि 84 प्रतिशत महिलाओं को रोजगार करने के लिए अपने परिवार की अनुमति लेनी पड़ती है।
गांधी के अनुसार, महिलाएं पुरुषों की तुलना में 25 प्रतिशत कम कमाती हैं और उन्हें आसानी से पदोन्नति नहीं मिलती।
भाषा आशीष सुरेश
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