‘कमजोर’ भाजपा दलों को तोड़ उनके नेताओं को अपने में शामिल करती : सपकाल

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‘कमजोर’ भाजपा दलों को तोड़ उनके नेताओं को अपने में शामिल करती : सपकाल

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  • Publish Date - June 12, 2026 / 09:51 PM IST,
    Updated On - June 12, 2026 / 09:51 PM IST

मुंबई, 12 जून (भाषा) कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर पलटवार करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ‘कमजोर’ है क्योंकि वह विरोधी पार्टियों को तोड़ती है और उनके नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल करती है।

सपकाल ने यह बयान फडणवीस के उस टिप्पणी पर दिया कि कांग्रेस ‘डूबता जहाज’ है और कोई भी समझदार व्यक्ति उसमें शामिल नहीं होगा।

सपकाल ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, ‘‘ जो लोग कांग्रेस को लेकर चिंतित हैं, उन्हें परेशान होने की ज़रूरत नहीं है। कांग्रेस इस देश के डीएनए, आम लोगों और हमारी गंगा-जमुनी संस्कृति व विरासत से जुड़ी हुई है।’’

उन्होंने कहा कि अगर भाजपा ने सच में विकास किया है, तो उसे तथ्यों के साथ अपना कामकाज लोगों के सामने रखना चाहिए।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, ‘‘जब आप दूसरी पार्टियों को तोड़ते हैं और बाहर से नेताओं को शामिल करते हैं, तो इसका अभिप्राय है कि आप कमज़ोर हैं। अगर आपको दूसरे दलों के समर्थन की ज़रूरत पड़ती है, तो इससे ज्ञात होता है कि आपकी अपनी पार्टी कमजोर हो रही है।’’

सपकाल ने कहा कि अगर एक जैसी विचारधारा वाली पार्टियां भाजपा का मुकाबला करने के लिए एकजुट होती हैं, तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है।

उन्होंने कहा,‘‘अगर एक जैसी विचारधारा वाली पार्टियां भाजपा से लड़ने के लिए एक साथ आती हैं, तो इसमें क्या गलत है? थोड़ा सब्र रखें और देखें कि आगे क्या होता है।’’

विपक्षी दलों के बीच संभावित विलय की खबरों पर सपकाल ने कहा कि उन्हें इस मामले में कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने साथ ही कहा कि ये अफवाहें जानबूझकर फैलाई जा रही हैं।

पार्टी की राज्य इकाई में अंदरूनी कलह की खबरों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘‘महाराष्ट्र कांग्रेस जो काम कर रही है, उसकी दिल्ली में सराहना की गई है। ऐसा कोई मुद्दा नहीं है।’’

सपकाल ने निर्वाचन आयोग पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि चुनावों के दौरान धनबल और बाहुबल का इस्तेमाल किया जा रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘हम सभी ने देखा है कि कैसे उम्मीदवारों को नाम वापस लेने के लिए मजबूर किया जाता है। यह मामला अब बस पैसे बहाने और तमाशा देखने का हो गया है।’’

भाषा धीरज माधव

माधव