How Ayodhya established: क्या आप जानते हैं कैसे हुई थी अयोध्या की स्थापना? जो बनी मर्यादा पुरुषोत्तम की पावन नगरी

How Ayodhya established?स्वर्णिम अक्षरों में इतिहास में दर्ज होने जा रही 22 जनवरी 2024, लेकिन क्या आप जानते है किसने की थी अयोध्या की स्थापना

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  • Publish Date - December 30, 2023 / 04:09 PM IST,
    Updated On - December 30, 2023 / 04:11 PM IST

How Ayodhya established? अयोध्या। 22 जनवरी 2024 ये तारीख इतिहास के पन्नों में स्वर्णिम अक्षर में दर्ज होने जा रही है। क्योंकि इस दिन मर्यादा पुरुषोत्तम की पावन नगरी अयोध्या में रामलला विराजमान होने जा रहें है। इसके लिए देशभर में जोरो-शोरो से तैयारियां चल रही है। राम मंदिर के उद्धाटन कार्यक्रम में शामिल होने के लिए देशभर के दिग्गजों को नयौता भेजा गया है। इसके अलावा कई लोग राम मंदिर के फैसले से इतना खुश है कि हजारों किलोमीटर की पैदल यात्रा कर अयोध्या पहुंच रहे है इस ऐतिहासिक दिन का हिस्सा बनने। अलावा इसके देशभर से रामलला के लिए तरह-तरह की चीजें भेजी जा रहीं है। लेकिन क्या आप जानते है कि आखिर अयोध्या की स्थापना कैसे हुई थी।

How Ayodhya established? भारत के प्राचीन नगरों में से एक अयोध्या को हिंदू पौराणिक इतिहास में पवित्र सप्त पुरियों में शामिल किया जाता है जिसमें मथुरा, हरिद्वार, काशी, कांची, उज्जैनी और द्वारका जैसे नगर शामिल हैं। अयोध्या को अर्थ वेद में ईश्वर का नगर बताया गया है और उसकी संपन्नता की तुलना स्वर्ग से की गई है। अयोध्या में कई महान योद्धा, ऋषि मुनि और अवतारी पुरुषों ने जन्म ले चुके हैं। भगवान राम ने भी यहीं जन्म लिया था।

How Ayodhya established? जैन मत का मानना है कि यहां आदिनाथ सहित 5 तीर्थंकरों का जन्म हुआ था। 24 तीर्थंकरों में से भी सर्वप्रथम तीर्थंकर आदिनाथ (ऋषभदेव जी) के साथ चार अन्य तीर्थंकरों का जन्म भी अयोध्या में हुआ था। बौद्ध मान्यता क कहना है कि बुद्ध देव ने अयोध्या 16 वर्षों तक निवास किया था।

How Ayodhya established? सरयू नदी के तट पर बसे इस नगर की रामायण अनुसार विवस्वान (सूर्य) के पुत्र वैवस्वत मनु महाराज द्वारा स्थापना की गई थी। मथुरा के इतिहास के अनुसार वैवस्वत मनु लगभग 6673 ईशा पूर्व हुए थे। ब्रह्मा जी के पुत्र मरीचि से कश्यप का जन्म हुआ, कश्यप से विवस्वान और विवस्वान के पुत्र वैवस्वत मनु थे।

How Ayodhya established? वैवस्वत मनु के 10 पुत्र इल, इक्ष्वाकु, कुशनाम, अरिष्ट, धृष्ठ, नरीष्यंत, करुष, महाबली, शर्यति और पृषध थे। इसमें इक्ष्वाकु कुल का ही ज्यादा विस्तार हुआ। इक्ष्वाकु कुल में कई महान प्रतापी राजा, ऋषि अरिहंत और भगवान हुए हैं। इसी कुल में आगे चलकर प्रभु श्रीराम हुए। अयोध्या पर महाभारत काल तक इसी वंश के लोगों का शासन रहा।

How Ayodhya established? पौराणिक कथाओं के अनुसार ब्रह्मा जी से जब मनु ने अपने लिए एक नगर निर्माण की बात कही तो वह उन्हें विष्णु जी के पास ले गए। विष्णु जी ने उन्हें साकेतधाम का उपयुक्त स्थान बताया। विष्णु जी ने इस नगरी को बसाने के लिए ब्रह्मा तथा मनु के साथ देव शिल्पी विश्वकर्मा को भेज दिया। इसके अलावा अपने रामअवतार के लिए उपयुक्त स्थान ढूंढने के लिए महर्षि वशिष्ठ को भी उनके साथ भेजा। मान्यता है कि वशिष्ठ द्वारा सरयू नदी के तट पर लीला भूमि का चयन किया गया। जहां विश्वकर्मा ने नगर का निर्माण किया।

How Ayodhya established? भगवान श्री राम के बाद लव श्रावस्ती बसाई और इसका स्वतंत्र उल्लेख अगले 800 वर्षों तक मिलता है। कहते हैं कि भगवान श्री राम के पुत्र कुश ने एक बार पुन: राजधानी अयोध्या का पुनर्निर्माण कराया था। इसके बाद सूर्यवंश की अगली 44 पीढ़ियों तक इसका अस्तित्व बरकरार रहा। रामचंद्र से लेकर द्वापर कालीन महाभारत और उसके बाद तक हमें अयोध्या के सूर्यवंशी इक्ष्वाकु के उल्लेख मिलते हैं।

How Ayodhya established? इस वंश का बृहद्रथ, अभिमन्यु के हाथों महाभारत में युद्ध में मारा गया था। महाभारत के युद्ध के बाद अयोध्या उजड़ सी गई लेकिन उस दौर में भी श्री राम जन्म भूमि का अस्तित्व सुरक्षित था। जो लगभग 14वीं सदी तक बरकरार रहा।

How Ayodhya established? बृहद्रथ के कई काल के बाद यह नगर मगध के मौर्यों को लेकर गुप्त और कन्नौज के शासकों के अधीन रहा। अंत में यहां पर महमूद गजनी के भांजे सैयद सालार ने तुर्की शासन की स्थापना की। वह बहराइच में 1033 ईस्वी में मारा गया था। उसके बाद तैमूर के पश्चात जब जौनपुर में शकों का राज्य स्थापित हुआ तो अयोध्या शकियों के अधीन हो गई। विशेष रूप से शक शासक महमूद शाह के शासनकाल में 1440 ई. में। बाद में 1526 ई. में बाबर ने मुगल राज्य की स्थापना की और उसके सेनापति ने 1528 में यहां पर आक्रमण कर मस्जिद निर्माण करवाया जो 1992 में मंदिर मस्जिद विवाद के चलते राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान ढहा दी गई।

How Ayodhya established? 6 दिसंबर 1992 को कारसेवकों ने बाबरी मस्जिद के गुंबद को ध्वस्त कर दिया था। इसके बाद यह मामला देश में हिंदू- मुस्लिम आस्था के बीच टकराव बनकर उभरा था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने नंवबर 2019 में फैसला सुनाया। चीफ जस्टिस रंजन गगोई की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के पांच जजों ने फैसला सुनाया इसके साथ ही यह विवाद खत्म हो गया। जिसके बाद 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होने जा रही है। इस दिन रामलला को एक बार फिर विराजमान किया जाएगा।

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