Chaitra Navratri 2026: क्या आपके घर भी जल रही है अखंड ज्योति? जान लें इन नियमों का पालन करना है अनिवार्य, वरना खाली रह जाएगी झोली..

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Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्री 2026 की शुरुआत 19 मार्च से हो चुकी है और इसका समापन 27 मार्च को नामनवमी के साथ होगा। यदि आपके घर में भी अखंड ज्योति जल रही है तो जान लें ये नियम...

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  • Publish Date - March 21, 2026 / 07:05 PM IST,
    Updated On - March 21, 2026 / 07:08 PM IST

Chaitra Navratri 2026/Image Source: IBC24

HIGHLIGHTS
  • अखंड ज्योति के नियम!
  • इस एक गलती से माता हो जाएंगी नाराज़!

Chaitra Navratri 2026चैत्र नवरात्री 2026 की शुरुआत 19 मार्च से हो चुकी है और इसका समापन 27 मार्च को नामनवमी के साथ होगा। इस दौरान, यदि आपके घर में भी अखंड ज्योति जल रही है तो इन नियमों का पालन करना आपके लिए बहुत ज़रूरी है। आइये आपको वे ज़रूरी नियम..

यदि आपके घर में भी अखंड ज्योति जल रही है तो इसका मतलब है कि अपने माँ दुर्गा की उपस्थिति और उनकी कृपा को निरंतर बनाये रखने के लिए संकल्प लिया है, जो कि माँ दुर्गा की मौजूदगी और भक्त की अटूट भक्ति का प्रतीक है। यह अखंड ज्योति, कलश स्थापना (घटस्थापना) के दिन प्रज्वलित की जाती है जो (रात-दिन) लगातार पूरे 9 दिनों तक बिना बुझे जलती रहनी चाहिए। माना जाता है कि अखंड ज्योति जलाने से सभी रोग व कष्ट दूर होते हैं साथ ही देवी की विशेष कृपा भी प्राप्त होती है।

लेकिन अखंड ज्योति सिर्फ जलाना काफी नहीं, बल्कि इसके साथ कई नियम ऐसे भी हैं जिनका पालन न करने से पूजा अधूरी मानी जाती है, जिससे आर्थिक बाधाएं, घर में अशांति और नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव पड़ सकता है। तो आइये जानते हैं जरूरी नियम..

Akhand Jyoti ke Niyam: अखंड ज्योति जलाने के ज़रूरी नियम..

  • ज्योति को 9 दिनों तक बिना बुझे जलाए रखें

अखंड का अर्थ ही है “अटूट“। यह भक्त की अटूट भक्ति, अंधकार पर प्रकाश की विजय साथ ही माँ की निरंतर उपस्थिति का प्रतीक है, इसलिए यह अखंड ज्योति (दिन-रात) लगातार पूरे 9 दिनों तक, बिना बुझे जलती रहनी चाहिए।

  • जलाने से पहले संकल्प लें और मंत्र पढ़ें

अखंड ज्योति जलाने से पहले संकल्प लें और “ॐ ज्योतिर्मयि देव्यै नमः”, “ॐ दुं दुर्गायै नमः” मन्त्रों का जाप करें। शास्त्रों के अनुसार, संकल्प से भक्ति मजबूत होती है माँ का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

  • घर पूरी तरह खाली छोड़कर बाहर न जाएं (किसी को घर में रहने दें)

अखंड ज्योति माँ दुर्गा का स्वरुप है इसलिए ज्योति को अकेली छोड़कर या घर बंद करके जाना माता का अपमान माना जाता है। इस दौरान, घर को पूरी तरह से खाली न छोड़े, किसी को भी घर में मौजूद ज़रूर रखें, वरना ज्योति बुझने का खतरा बढ़ जाता है जिससे माँ नाराज़ हो सकती हैं और घर में क्लेश और अनिष्ट संकेत मिल सकते हैं।

  • दीपक को कभी भी ज़मीन पर सीधे न रखें बल्कि ऊँचे स्थान पर रखें!

हिन्दू शास्त्रों के अनुसार, दीपक को ज़मीन पर रखना अपवित्र माना जाता है इसलिए अखंड ज्योति के दीपक को सदैव ऊँचे स्थान पर रखें।

  • बाती लम्बी एवं सही रखें!

दीपक में अखंड ज्योति की बाती लम्बी एवं सही रखें। यदि बीच में बाती बदलने की आवश्यकता हो तो उसे अखंड ज्योति से ही जलाएं। ज्योति का फूंक मारकर या हवा से बुझना अशुभ माना जाता है।

  • अखंड ज्योति को ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) या अग्नि कोण में रखें

ईशान यानी (उत्तर-पूर्वीय) दिशा देवताओं की दिशा है, जहां मां की कृपा सबसे ज्यादा आती है, इसलिए ज्योति को ईशान कोण में रखने से पूजा का पूरा लाभ मिलता है।

  • ज्योति को कभी अकेला न छोड़ें

समय-समय पर घी/तेल डालते रहें, क्योंकि निरंतर देखभाल से ही ज्योति अखंड रहती है।

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नवरात्रि में अखंड ज्योति क्यों जलाते हैं?

अखंड ज्योति मां दुर्गा की निरंतर उपस्थिति का प्रतीक है। यह घर से अंधकार (नकारात्मकता) दूर करती है, सुख-समृद्धि लाती है और मनोकामनाएं पूरी करती है।

अखंड ज्योति बुझ जाए तो क्या अपशकुन होता है?

नहीं, जरूरी नहीं। ज्यादातर मामलों में यह भौतिक कारण (हवा, घी कम होना) से होता है। भाव शुद्ध हो तो मां क्षमा करती हैं – डरने की जरूरत नहीं।

अखंड ज्योति में कौन सा घी/तेल इस्तेमाल करें?

सबसे अच्छा शुद्ध देसी गाय का घी। विकल्प में शुद्ध तिल या सरसों का तेल। तामसिक चीजें (जैसे सरसों तेल अगर अशुद्ध) न यूज करें।

अखंड ज्योति कहां रखनी चाहिए?

ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में, ऊंचे स्थान पर (चौकी/पीतल थाली पर लाल कपड़ा बिछाकर)। जमीन पर कभी न रखें।