Kashi Mahadev/Image Credit: ScreenGrab / AI Generated / @Grok
Kashi Mahadev: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, काशी केवल एक साधारण शहर नहीं है। यह साक्षात् मोक्ष की नगरी और भगवान शिव का प्रिय स्थान है, जहां आज भी शिव-पार्वती निवास करते हैं। वेदों और पुराणों में काशी को साक्षात शिव का रूप और मोक्ष की भूमि मना गया है। यहां स्थित काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग को संसार का पहला ज्योतिर्लिंग (आदि-ज्योतिर्लिंग) माना जाता है।
एक कथा के अनुसार, भगवान शिव से विवाह के बाद माता पार्वती उनके साथ कैलाश पर्वत चली गई। माता पार्वती जी वैसे तो हिमालय की पुत्री थीं, फिर भी कुछ समय पश्चात वे वहाँ अकेला महसूस करने लगीं। वे मनुष्यों के बीच रहना चाहती थी, इसलिए उन्होंने भोलेनाथ से कहा कि “हर स्त्री विवाह के बाद अपने पति के घर जाती है, लेकिन मैं तो अब भी अपने पिता के घर (हिमालय) पर ही रह रही हूँ।
माता पार्वती की यह सुनकर भगवान शिव मुस्कुरा दिए और उन्होंने उनकी बात मान ली। फिर वे माता पार्वती को लेकर पृथ्वी पर गंगा किनारे आ गए और काशी पर ही अपना नया घर बनाकर वहीं बस गए। तभी से काशी को महादेव का स्थायी निवास माना जाता है। शिवजी का कैलाश छोड़ना हमें सिखाता है कि प्रेम में अपनों की खुशी के लिए झुकना कमजोरी नहीं, बल्कि महानता है। पार्वती जी की इच्छा का सम्मान करते हुए उन्होंने काशी को अपना परम धाम बनाया, जो आज भी संसार के लिए साक्षात् मोक्ष का द्वार है।
आज काशी के प्रसिद्द विश्वनाथ मंदिर में भगवान शिव स्वयं ज्योतिर्लिंग के रूप में विराजमान हैं। यह पावन मंदिर श्रद्धा, अनन्य भक्ति और सनातन संस्कृति का अद्भुत प्रतीक है। माना जाता है कि जो भी भक्त यहां सच्चे मन से बाबा विश्वनाथ का दर्शन करता हैं वह समस्त कष्टों से मुक्त हो जाता हैं।
कहा जाता है कि जो भक्त सच्चे मन से बाबा विश्वनाथ की पूजा करता है उसकी सारी ज़िम्मेदारी भगवान स्वयं उठाते हैं और वे न केवल उस भक्त की पीड़ा हरते हैं बल्कि मृत्यु के समय तारक मंत्र देकर मोक्ष प्रदान करते हैं।