(Mahashivratri 2026/ Image Credit: Screengrab)
नई दिल्ली: Mahashivratri 2026 Shubh Sanyog हर साल फाल्गुन माह की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का पावन त्योहार मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यही वह दिन था जब भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। शिव-शक्ति के मिलन की याद में यह पर्व भक्तों द्वारा बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन भक्त भोलेनाथ का व्रत रखते हैं और उनकी विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।
इस साल महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाई जाएगी। यह महाशिवरात्रि बेहद खास इसलिए है क्योंकि इस दिन और रात में ग्रहों के दुर्लभ संयोग बन रहे हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, सूर्य, बुध और शुक्र विशेष स्थिति में रहेंगे, जिससे त्रिग्रही योग बनेगा। इसके अलावा, व्यतिपात योग, वरियान योग, ध्रुव योग और राजयोग जैसे कई शुभ योग भी बन रहे हैं। यह स्थिति 300 सालों में पहली बार बन रही है, जिससे इस महाशिवरात्रि की महत्व और बढ़ गया है।
महाशिवरात्रि के दिन रात के चार पहरों में पूजा का विधान है। यही कारण है कि रात भर जागकर साधना करने की परंपरा है। इस रात को जागने और पूजा करने से विशेष ऊर्जा मिलती है और भक्तों के जीवन में सुख-शांति और खुशहाली आती है। ज्योतिष गणना के मुताबिक, इस बार महाशिवरात्रि की रात ऊर्जा का स्रोत ऊर्ध्वगमनशील रहेगा, इसलिए साधना करने से विशेष लाभ होगा।
अगर पूरी रात जागना संभव नहीं है तो एक 45 मिनट का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त है, जिसमें पूजा और साधना करना चाहिए। यह मुहूर्त रात 12:09 बजे से 1 बजे तक रहेगा। इस समय ग्रहों का सबसे शुभ संयोग बन रहा है। इस दौरान की गई साधना और पूजा से विशेष लाभ और आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है।
महाशिवरात्रि पर की गई साधना से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आशीर्वाद मिलता है। इस रात में भगवान शिव और माता पार्वती अपने भक्तों को विशेष आशीर्वाद देते हैं। ग्रहों के दुर्लभ संयोग और शुभ मुहूर्त का लाभ उठाकर साधना करने से मानसिक और आध्यात्मिक शक्ति बढ़ती है और जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।