Premanand Ji Maharaj Mahashivratri/Image Source: Social media
Premanand Ji Maharaj Mahashivratri: महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर प्रेमानंद महराज ने बताया कि इस दिन भक्तों की दिनचर्या और पूजा-अर्चना कैसी होनी चाहिए। महराज ने बताया कि महाशिवरात्रि के दिन उपवास और आठों पहर की पूजा का विशेष महत्व है।
महाशिवरात्रि पर चार पहर दिन के और चार पहर रात्रि के लिए भक्त पूरी तरह उपवास रखते थे। पूरे दिन भोजन नहीं करते और रातभर जागते रहते थे। इस दौरान भगवान शंकर की आराधना विशेष विधि से होती थी। प्रेमानंद महराज ने कहा कि आराधना में मंत्र जप, नाम स्मरण और चिंतन की विशेष महिमा है।
Premanand Ji Maharaj Mahashivratri: महराज ने बताया कि रात्रि में “ साम्ब सदाशिव” मंत्र का जप किया जाता था। इसे बोलने के बजाय भीतर मन में जपना चाहिए और इसे गुरु से सीखना आवश्यक है। मंत्र का सही साधनापूर्वक जप करने से शिव की कृपा मिलती है।
महाशिवरात्रि के दिन दिनचर्या कैसी रहनी चाहिए? pic.twitter.com/SvIWEwpg2n
— Bhajan Marg (@RadhaKeliKunj) February 15, 2026
महराज ने बताया कि महाशिवरात्रि के दिन पूजा में कुछ खास चीज़ों का प्रयोग किया जाता है, जैसे बेलपत्र, धतूरा का फल और कौड़े का फूल। साथ ही एक लोटा जल चढ़ाना आवश्यक होता है। उन्होंने कहा कि ये चीज़ें भगवान शिव को अत्यंत प्रिय हैं और इनसे ही पूजा पूर्ण मानी जाती है। प्रेमानंद महराज ने महाशिवरात्रि के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यह दिन भक्तिभाव, उपवास और रातभर जागरण का प्रतीक है। भगवान शिव की आराधना में सही साधना, मंत्र और प्रेम से भरा हृदय ही सबसे बड़ा पुण्य है।