Hindu Dharam: जब शिवलिंग के टुकड़े-टुकड़े हो जाते हैं, और फिर मक्खन से दोबारा जुड़ जाते हैं! रोंगटे खड़े कर देगा, महादेव के इन 6 दिव्य मंदिरों का रहस्य
Hindu Dharam: आखिर क्यों इस शिवलिंग में हैं हजारों छोटे-छोटे छिद्र? सावन के इस पावन सोमवार पर आइए चलते हैं महादेव के उन चमत्कारी धामों की यात्रा पर, जहाँ हर …

Shiv ji ke Rahasyamayi mandir
- इंसानी सोच से परे हैं महादेव के ये रूप!
- आखिर क्यों गायब हो जाता है यह मंदिर?
Hindu Dharam: आज सावन का दूसरा सोमवार है और हर तरफ शिव भक्ति की धूम है। श्रावण मास शिव भक्तों के लिए अत्यंत ख़ास होता है। इस दिन भक्त भगवान शिव का जलाभिषेक कर के उनका आशीर्वाद पाते हैं। इस कलियुग में भी भोलेनाथ की लीलाएं और उनके चमत्कारी मंदिरों के रहस्य, लोगों को आश्चर्यचकित कर देते हैं। वैसे तो हमारे देश के कोने-कोने में भोले बाबा यानी भगवान शिव के अनगिनत मंदिर है, लेकिन कुछ मंदिर इतने अनोखे हैं कि जिनके रहस्यों को आज का विज्ञान भी नहीं सुलझा पाया है। आइये, ऐसे ही कुछ रहस्यमय मंदिरों के बारे में जानते हैं..
भगवान शिव के रहस्यमय मंदिर: कलयुग के 6 सबसे जादुई और दिव्य शिव मंदिर!
बोरेश्वर महादेव (Boreshwar Mahadev)
मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर से करीब 36 किलोमीटर दूर दंगवाड़ा गाँव में "बोरेश्वर महादेव" मंदिर है। यह मंदिर करीब पांच हज़ार वर्ष पुराना माना जाता है। यहां मौजूद 'स्वयंभू शिवलिंग' की जलधारी का चमत्कार हर किसी को हैरान कर देता है। भक्त यहाँ चाहे जितना भी जल चढ़ाएं, जलधारी का जल न तो कभी बढ़ता है और न ही घटता है, वह हमेशा एक जैसा रहता है। भक्तों का विश्वास है कि, यहाँ चढ़ाया गया जल सीधे पाताल गंगा में समा जाता है, और जलधारी में डाले गए सिक्के भी गायब हो जाते हैं।
स्तम्भेश्वर महादेव (Stambeshwar Mahadev)
गुजरात के भरुच जिले में, कवी कंबोई गाँव के पास अरब सागर के तट पर "स्तम्भेश्वर महादेव" मंदिर स्थित है । करीब 150 वर्ष पूर्व खोजे गए इस ऐतिहासिक मंदिर का वर्णन 'शिव पुराण' की 'रूद्र संहिता' में भी मिलता है। इस मंदिर की सबसे अद्भुत विशेषता यह है कि यह मंदिर दिन में दो बार कुछ समय के लिए पूरी तरह अदृश्य यानी 'गायब' हो जाता है। वास्तव में, ज्वार आने पर समुद्र का जल स्तर इतना बढ़ जाता है कि पूरा मंदिर पानी में डूब जाता है, और केवल शिवलिंग का ऊपरी हिस्सा ही नज़र आता है।
ज्वार उतरने के बाद मंदिर फिर से भक्तों के सामने प्रकट हो जाता है, इसलिए श्रद्धालु समुद्र की लहरों के समय को ध्यान में रखकर ही यहाँ दर्शन के लिए आते हैं। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान कार्तिकेय ने राक्षस तारकासुर का वध करने के बाद इस शिवलिंग की स्थापना की थी। यहाँ महादेव का अभिषेक दूध की जगह तेल से करने की अनूठी परंपरा है, और ऐसा प्रतीत होता है मानो स्वयं समुद्र देव अपनी लहरों से भोलेनाथ का जलाभिषेक कर रहे हों।
अचलेश्वर महादेव (Achaleshwar Mahadev)
राजस्थान के धौलपुर के डरावने चम्बल के बीहड़ों के बीच छुपा है एक ऐसा रहस्य, जिसे विज्ञान भी नहीं सुलझा पाया। हम बात कर रहे हैं "अचलेश्वर महादेव" मंदिर की। यहाँ पर मौजूद शिवलिंग दिन में तीन बार अपना रंग बदलता है। सुबह के समय लाल, दोपहर में केसरिया और शाम होते-होते कला हो जाता है। इस रंग परिवर्तन का कारण आज तक कोई नहीं जान पाया। लेकिन रहस्य सिर्फ इतना ही नहीं है..
इस शिवलिंग की गहराई का पता आज तक कोई नहीं जान पाया। कहा जाता है कि कई साल पहले इसके अंत का पता लगाने के लिए खुदाई की गई थी, लेकिन पाताल तक खोदने के बाद भी शिवलिंग का निचला छोर नहीं मिला। भक्त इसे महादेव की दिव्य लीला मानकर शीश झुकाते हैं।
निष्कलंक महादेव (Nishkalank Mahadev)
गुजरात के भावनगर जिले में कोलियाक तट से तीन किलोमीटर अंदर समुद्र में "निष्कलंक महादेव" मंदिर स्थित है। यहाँ का नज़ारा अद्भुत है, क्योंकि रोज़ समुद्र की लहरें स्वयं भोलेनाथ का अभिषेक करती हैं। ज्वार के समय पूरा मंदिर पानी में डूब जाता है और सिर्फ एक ध्वज (झंडा) लहराता हुआ दिखाई देता है।
भाटा उतरने पर भक्त पैदल चलकर मंदिर पहुँचते हैं। कहा जाता है कि महाभारत युद्ध के बाद, भगवान श्री कृष्ण के कहने पर पांडवों ने यहाँ तपस्या की और शिवलिंग की स्थापना की। इसलिए इसे 'निष्कलंक' यानी 'बिना किसी कलंक के' महादेव कहा जाता है। यह चमत्कारी मंदिर आज भी गवाह है कि सच्ची भक्ति से हर पाप कट जाता है।
बिजली महादेव (Bijli Mahadev)
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में ऊंचे पहाड़ों पर स्थित यह मंदिर अपने अद्भुत चमत्कारों के लिए जाना जाता है। जी हाँ! हम बात कर रहे हैं "बिजली महादेव मंदिर" की। यहाँ हर बारह साल में आसमान से भयंकर बिजली सीधे शिवलिंग पर आकर गिरती है, जिससे शिवलिंग खंडित हो जाता है। इसके पश्चात, पुजारी मक्खन के लेप की सहायता से इन टुकड़ों को आपस में जोड़ देते हैं।
हैरानी की बात तो यह है कि कुछ समय बाद, महादेव के चमत्कार से शिवलिंग दोबारा अपने ठोस रूप में बदल जाता है। इस आलौकिक दृश्य को देखकर भक्त हैरान रह जाते हैं और और ऐसा प्रतीत होता है मानों स्वयं प्रकृति आकाशीय बिजली के रूप में महादेव की आराधना कर रही हो।
लक्ष्मेश्वर महादेव (Lakshmeshwar Mahadev)
छत्तीसगढ़ के खरौद में स्थित "लक्ष्मेश्वर महादेव" मंदिर की कथा भगवान शिव और श्री राम से जुडी है। मान्यता है कि राक्षस खर और दूषण के वध के बाद, लक्ष्मण जी के कहने पर श्री राम ने इस शिवलिंग की स्थापना की थी। इसे "लक्ष्यलिंग" भी कहा जाता है क्योंकि इस शिवलिंग में हज़ारों छोटे-छोटे छिद्रों में से एक छिद्र को 'पातालगामी' माना जाता है, जिसमें चाहे जितना भी जल डाला जाए, वह पूरी तरह समा जाता है।
वहीं, एक अन्य छिद्र ऐसा है जो हमेशा जल से भरा रहता है, जिसे 'अक्षय कुंड' कहा जाता है। शिवलिंग पर चढ़ाया गया जल मंदिर के ठीक पीछे स्थित एक 'विशेष कुंड' में पहुँचता है कभी नहीं सूखता। वास्तव में, यह मंदिर राम और शिव की भक्ति का एक अनोखा उदाहरण है।
Disclaimer:- उपरोक्त लेख में उल्लेखित सभी जानकारियाँ प्रचलित मान्यताओं और धर्म ग्रंथों पर आधारित है। IBC24.in लेख में उल्लेखित किसी भी जानकारी की प्रामाणिकता का दावा नहीं करता है। हमारा उद्देश्य केवल सूचना पँहुचाना है।
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सामान्यतः पूछे जाने वाले प्रश्नः
उत्तर: राजस्थान के धौलपुर में स्थित अचलेश्वर महादेव मंदिर का शिवलिंग दिन में तीन बार (सुबह लाल, दोपहर में केसरिया और शाम को काला) रंग बदलता है। इस अनूठे रंग परिवर्तन का सटीक वैज्ञानिक कारण आज तक कोई नहीं जान पाया है, वैज्ञानिक भी इसे एक अनसुलझा रहस्य मानते हैं।
लेखक के बारे में
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और भी पढ़ें...Web Title: Hindu Dharam: At one place, a temple vanishes in an instant; at another, the Shivling changes color three times a day! Have you witnessed these 6 miraculous forms of Mahadev?
धर्म
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