Sawan 2026 Sadesati: क्या साढ़ेसाती और ढैय्या ने रोक रखी है आपकी तरक्की? जानें, इन उपायों से कैसे विफल हो जाती है साढ़ेसाती की वक्र दृष्टि?

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Sawan 2026 Sadesati: सावन का यह पवित्र महीना केवल भगवान शिव की पूजा के लिए ही नहीं, बल्कि शनिदेव की वक्र दृष्टि एवं शनि दोषों (विशेषकर साढ़ेसाती और ढैय्या) के निवारण के लिए भी अत्यंत सिद्ध समय माना गया है। आइये जाने लें उन अचूक उपायों के बारे में जिससे शनि की टेढ़ी नज़र भी हो जाएगी सीधी..

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  • Publish Date - July 30, 2026 / 02:36 PM IST,
    Updated On - July 30, 2026 / 02:38 PM IST

Sawan 2026 Sadesati/Image Credit: ScreenGrab / AI Generated / @Grok

HIGHLIGHTS
  • साढ़ेसाती से मुक्ति के अचूक उपाय!
  • शिव भक्ति की वो शक्ति, जिसके आगे शनि की क्रूर दृष्टि भी हो जाती है बेअसर!

Sawan 2026 Sadesati Rashi: आज से सावन (श्रावण) मास की शुरुआत हो चुकी है। यह पवित्र महीना केवल भगवान शिव की पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि शनिदेव की वक्र दृष्टि एवं शनि दोषों (विशेषकर साढ़ेसाती और ढैय्या) के निवारण के लिए भी अत्यंत सिद्ध समय माना गया है। अगर आप सावन में भोलेनाथ की भक्ति के साथ-साथ शनि देव से जुड़े उपाय करते हैं तो शनिदेव की टेढ़ी नज़र का असर कम होता है और घर में खुशियों के साथ सुख, शांति और समृद्धि आती है।

अगर आप भी इस समय शनि की महादशा से परेशान हैं, तो सावन का यह पवित्र महीना आपके लिए एक चमत्कारी वरदान साबित हो सकता है। लेकिन, उपायों को जानने से पहले, आइये आसान शब्दों में समझते हैं कि आख़िर यह साढ़ेसाती और ढ़ैय्या होती क्या है?

Sawan 2026: साढ़ेसाती और ढैय्या क्या है?

  • साढ़ेसाती: शनि साढ़ेसाती वह अवधि होती है जब शनि ग्रह, व्यक्ति की जन्म राशि के ठीक एक घर पहले बारहवें (12वें), उसी राशि में पहले (1ले) और दूसरे (2सरे) भाव में कदम रखते हैं, तो उसे साढ़ेसाती कहते हैं। चूँकि शनि एक राशि में ढ़ाई साल रहते हैं, इसलिए इन तीन घरों को पार करने में उन्हें साढ़े सात साल का समय लगता है। इस दौरान व्यक्ति को जीवन में कड़ी मेहनत करनी पड़ती है, कामों में देरी होती है और साथ ही कई कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
  • ढैय्या: वहीं ढैय्या तब लगती है जब शनि ग्रह राशि में चौथे (4थे) या आठवें (8वें) भाव में आता है और करीब ढाई सालों तक अपना प्रभाव दिखाता है।

वर्तमान स्थिति की बात करें तो (वर्ष 2026) में शनि देव, मीन राशि में गोचर कर रहे हैं। आइये जानते हैं कि इस समय किन राशियों पर शनि की साढ़ेसाती का साया है और किन सरल और अचूक उपायों से इसका प्रभाव कम हो सकता है?

वर्तमान में, इन राशियों पर चल रही है शनि की साढ़ेसाती!

  • मेष: मेष राशि पर शनि की साढ़ेसाती का पहला चरण जारी है।
  • मीन: मीन राशि पर शनि की साढ़ेसाती का दूसरा (मध्य) चरण जारी है, जिसे सबसे अधिक प्रभावकारी माना जाता है।
  • कुम्भ: कुम्भ राशि पर शनि की साढ़ेसाती का अंतिम यानी तीसरा चरण जारी है।

Sadesati Rashi: सावन में शनि दोष निवारण का आसान एवं अचूक उपाय!

  • भगवान शिव की पूजा और बेलपत्र अर्पण!

सावन में प्रतिदिन या कम से कम हर सोमवार को शिवजी को बेलपत्र, जल, दूध, घी, शहद और गंगाजल अर्पित करें। “ॐ नमः शिवाय” का जाप करें। भगवान शिव शनिदेव के गुरु हैं, इसलिए भोलेनाथ की आराधना करने से शनि का प्रकोप बहुत जल्दी शांत होता है।।

  • पीपल के वृक्ष के नीचे दीया जलाएँ!

सावन के हर शनिवार को शाम के समय (सूर्यास्त के बाद) पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का (चौमुखा) चार बत्तियों वाला दीपक जलाएं। दीपक में थोड़े काले तिल और लोहे की कील जरूर डालें, फिर पेड़ के सात चक्कर लगाएं।

  • हनुमान जी की विशेष पूजा!

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जी शनिदेव के मित्र हैं। अतः सावन में नियमित रूप से हनुमान चालीसा अथवा बजरंग बाण का पाठ करने से शनिदेव का प्रकोप शांत रहता है। शनिवार के दिन पवनपुत्र हनुमान जी को सिंदूर और चमेली का तेल चढ़ाना भी बहुत फायदेमंद होता है।

  • छाया दान करें!

शनिवार की सुबह एक मिट्टी या लोहे के कटोरे में सरसों का तेल लें और उसमें अपना चेहरा (छाया) देखें। इसके बाद उस तेल को किसी गरीब या ज़रूरतमंद को दान कर दें या पास के शनि मंदिर में रख आएं, ज्योतिष शास्त्र में इसे ‘छाया दान’ कहा जाता है। यह साढ़ेसाती और ढैय्या के बुरे प्रभावों को कम करने का सबसे अचूक और प्रभावी उपाय है।

मंत्र जाप: सावन में नियमित रूप से मन्त्रों का जाप करना बहुत लाभकारी है।

  • ॐ नमः शिवाय (शिव मंत्र) – 108 बार।
  • ॐ शं शनैश्चराय नमः या ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः – शनि मंत्र।

गरीब, ज़रूरतमंदों की सेवा और दान!

शनि देव हमारे कर्मों के अनुसार फल देते हैं। इसलिए सावन के पावन महीने में काले तिल, काली उड़द, छाता, जूते और काले कपड़ों का दान किसी गरीब या ज़रूरतमंद व्यक्ति को ज़रूर करें। इसके साथ ही इस बात का खास ध्यान रखें कि कभी भी किसी बुजुर्ग या असहाय व्यक्ति का दिल न दुखाएं और न ही उनका अपमान करें।

Disclaimer:- उपरोक्त लेख में उल्लेखित सभी जानकारियाँ प्रचलित मान्यताओं और धर्म ग्रंथों पर आधारित है। IBC24.in लेख में उल्लेखित किसी भी जानकारी की प्रामाणिकता का दावा नहीं करता है। हमारा उद्देश्य केवल सूचना पँहुचाना है।

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सावन के महीने में शिव पूजा करने से शनि देव क्यों शांत होते हैं?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव शनिदेव के परम गुरु हैं। शनिदेव ने महादेव को प्रसन्न करके ही नवग्रहों में न्यायाधीश का पद पाया था। इसलिए, जब कोई भक्त सावन में शिव जी की पूजा करता है, तो शनिदेव अपने गुरु के भक्त पर हमेशा कृपालु रहते हैं और अपनी वक्र दृष्टि (बुरा प्रभाव) हटा लेते हैं।

शनि साढ़ेसाती और ढैय्या में क्या अंतर है और ये कितने समय तक परेशान करती हैं?

जब शनि आपकी जन्म राशि से एक घर पहले, आपकी राशि में, और आपकी राशि से अगले घर में गोचर करते हैं, तो उसे साढ़ेसाती कहते हैं (यह 7.5 साल चलती है)। वहीं, जब शनि आपकी राशि से चौथे या आठवें घर में होते हैं, तो उसे ढैय्या कहते हैं (यह 2.5 साल चलती है)। दोनों ही समय जीवन में कठिन परीक्षा, देरी और कड़े संघर्ष लेकर आते हैं।

छाया दान क्या है और सावन के शनिवार को इसे कैसे करना चाहिए?

शनिवार की सुबह एक मिट्टी या लोहे के कटोरे में सरसों का तेल भरें। उसमें अपना चेहरा (छवि) देखें और फिर उस तेल को कटोरे सहित किसी गरीब को दान कर दें या शनि मंदिर में रख आएं। इसे 'छाया दान' कहते हैं। यह आपके ऊपर मंडरा रहे कष्टों और साढ़ेसाती के दुष्प्रभावों को सीधे अपने ऊपर ले लेता है और आपको राहत देता है।

सावन में शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए किन चीजों का दान सबसे उत्तम माना गया है?

शनिदेव कर्मफल दाता हैं और उन्हें काली व लोहे की वस्तुएं प्रिय हैं। सावन में काले तिल, काली उड़द की दाल, छाता, जूते-चप्पल और काले रंग के कपड़ों का दान किसी ज़रूरतमंद को करना सबसे उत्तम माना गया है। इसके साथ ही किसी बुजुर्ग या असहाय व्यक्ति का अपमान न करना सबसे बड़ा आचरण दान है।