Shani Jayanti 2026: तेल चढ़ाने का सही तरीका नही अपनाया तो शनि जयंती पर पड़ सकता है उल्टा असर! फायदे की जगह हो सकता है बड़ा नुकसान!

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Shani Jayanti 2026: ज्येष्ठ अमावस्या को शनि जयंती के रूप में मनाया जाता है। जब भक्त शनि देव को प्रसन्न करने के लिए सरसों का तेल चढ़ाते हैं। लेकिन तेल अर्पित करने के कुछ खास नियम होते हैं। जिनका पालन करना बहुत जरूरी माना जाता है वरना पूजा का असर कम हो सकता है।

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  • Publish Date - May 14, 2026 / 11:11 AM IST,
    Updated On - May 14, 2026 / 11:11 AM IST

(Shani Jayanti 2026/ Image Credit: IBC24 News)

HIGHLIGHTS
  • शनि जयंती 2026 में 16 मई को मनाई जाएगी
  • शनि देव को कर्मफल दाता माना जाता है
  • सरसों का तेल चढ़ाना विशेष रूप से शुभ माना गया है

Shani Jayanti 2026 Kab Hai: हिंदू धर्म में शनि देव को न्याय का देवता और कर्मों का फल देने वाला माना जाता है। मान्यता है कि वे हर व्यक्ति को उसके अच्छे और बुरे कर्मों के अनुसार परिणाम देते हैं। इसलिए उनकी पूजा में अनुशासन, नियम और श्रद्धा का विशेष महत्व होता है। इस वर्ष 2026 में शनि जयंती 16 मई को मनाई जाएगी।

शनि जयंती का धार्मिक महत्व

शनि जयंती ज्येष्ठ अमावस्या के दिन मनाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन शनि देव का जन्म हुआ था जो सूर्य देव और माता छाया के पुत्र माने जाते हैं। यह दिन शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या से परेशान लोगों के लिए बहुत खास माना जाता है। इस दिन पूजा करने से जीवन की कठिनाइयों में राहत मिलने की मान्यता है।

पूजा और परंपराएं

शनि जयंती पर भक्त व्रत रखते हैं और शनि देव की विशेष पूजा करते हैं। इस दिन सरसों का तेल, काला तिल, उड़द दाल, नीले फूल और काले वस्त्र अर्पित किए जाते हैं। कई लोग पीपल के पेड़ की पूजा करते हैं और शनि मंदिर जाकर दर्शन करते हैं। इसके साथ ही दान-पुण्य करने का भी विशेष महत्व माना गया है।

सरसों का तेल क्यों चढ़ाया जाता है?

मान्यता है कि सरसों का तेल शनि देव को अत्यंत प्रिय है। पौराणिक कथा के अनुसार जब हनुमान जी ने शनि देव को रावण की कैद से मुक्त कराया था तब उनके शरीर पर तेल लगाया गया जिससे उन्हें आराम मिला। तभी से शनि देव को तेल अर्पित करने की परंपरा शुरू हुई। इसे शनि ग्रह के प्रभाव को शांत करने वाला भी माना जाता है।

तेल चढ़ाने में बरती जाने वाली सावधानियां

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनि देव को तेल चढ़ाते समय कुछ नियमों का पालन जरूरी है। सीधे मूर्ति पर अधिक मात्रा में तेल नहीं डालना चाहिए। हमेशा शुद्ध और नया सरसों का तेल ही प्रयोग करना चाहिए। पूजा में तांबे के बर्तन के बजाय लोहे या मिट्टी के बर्तन का उपयोग शुभ माना जाता है।

सही पूजा विधि और लाभ

शनि जयंती के दिन सुबह स्नान करके साफ और गहरे रंग के वस्त्र पहनने चाहिए। इसके बाद शनि देव की पूजा और शनि चालीसा का पाठ करना शुभ माना जाता है। हनुमान चालीसा पढ़ना भी लाभकारी माना जाता है। इस दिन जरूरतमंदों को दान करने से विशेष पुण्य मिलता है और शनि दोष, साढ़ेसाती या ढैय्या से राहत मिलने की मान्यता है।

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शनि जयंती कब मनाई जाती है?

शनि जयंती ज्येष्ठ अमावस्या के दिन मनाई जाती है, जो 2026 में 16 मई को होगी।

शनि देव को न्याय का देवता क्यों कहा जाता है?

मान्यता है कि वे हर व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं।

शनि जयंती पर क्या पूजा की जाती है?

इस दिन शनि देव को सरसों का तेल, काला तिल, उड़द दाल और नीले फूल अर्पित किए जाते हैं।

सरसों का तेल क्यों चढ़ाया जाता है?

मान्यता है कि सरसों का तेल शनि देव को प्रिय है और इससे शनि दोष शांत होता है।